अपने ही सरकार मे उपेक्षित भाजपा विधायक और कार्यकरता

लखनऊ-  जैसे भगवान राम का बनवास 14 शाल के बाद खत्म हुआ, ठीक उसी तरह उत्तर प्रदेश की सत्ता से भाजपा का बनवास खत्म हुआ। उत्तर प्रदेश की सत्ता मे वापसी से भाजपा व उसके अन्य सहयोगी संगठन के लोग इतना खुस थे कि बस उनकी खुसी के बारे मे कुछ मत पुछिये। भाजपा के कार्यकरताओं ने इस 14 शाल मे सत्ताधारी सपा और बसपा के कार्यकरताओं का जलवा शासन और प्रशासन मे  देखा था, किसी अधीकारी कर्मचारी की औकात नही थी कि सत्ताधारी दल के कार्यकरता की बात या सिफारिस को नजरअंदाज कर दे। सत्ता बदली और योगी बाबा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गये। मुख्यमंत्री बनते ही योगी बाबा ने सभी अधिकारियों को फरमान जारी कर दिया कि ” सत्ता से या बिपक्ष से जूडे किसी भी ब्यक्ती की गलत शिफारिस को अधीकारी या कर्मचारी न माने । बस योगी बाबा के इसी फरमान का फायदा उठाया अधीकारीयों ने और सत्ताधारी दल के विधायकों और कार्यकरताओं की उपेक्षा करना शुरू कर दिया। आज गाजीपुर की हालत यह है दरोगा विधायक के पैरवी करने पर कहता है कि  ” मैडम लेटर पैड पर लिख कर भेंज दे,,। अब आप भाजपा कार्यकरताओं की पैरवी का क्या हाल होगा , खुद समक्ष सकते है। ( ये लेखक के अपने बिचार है)

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