उमाशंकर कुशवाहा ने मारी पलटी, अब हुए भाजपाई

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गाजीपुर सदर विधान सभा पर कभी बसपा के चूनाव चिन्ह पर विजय का परचम लहराने वाले उमाशंकर कुशवाहा ने अन्तत: आज भाजपा का दामन थाम ही लिया। वर्ष 2012 मे बसपा के चुनाव चिन्ह पर जमानियाँ विधान सभा का चूनाव हारने के बाद , सपा की सरकार बनने पर कोवापरेटिव के चेयर मैन होने के कारण लाल बत्ती छिन जाने का भय ,उमशंकर कुशवाहा को समाजवादी बनने पर मजबूर कर दिया था। एक दुशरे कारण ने भी उमाशंकर कुशवाहा को समाजवादी वनने पर मजबूर कर दिया। वह मामला भगवान बुद्ध के विदेशी मूर्ति चोरी या तस्करी का मामला था जिसमे उमाशंकर कुशवाहा को पुलिस प्रताणित कर रही थी।
   उमाशंकर कुशवाहा के भाजपा मे जाने के पीछे भी कम रोचक कहानी नही है। उमाशंकर कुशवाहा जब बसपा मे थे तो सदैव स्वामी प्रसाद मौर्या और बाबू सिह कुशवाहा के करीबी रहे है।  गाजीपुर टुडे डाँट काँम ने एक सप्ताह पहले ही यह खबर अपने पोर्टल पर लागा दिया था कि स्वामी प्रसाद मौर्य की नजर जंगीपुर और जमानियाँ विधान सभा पर है । उमाशंकर कुशवाहा के भाजपाई होने की असली गणित यही है।

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