गन्ना किसानों का बकाया 1800 करोड़ और महाकुंभ पर खर्च 3500 करोड़

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लोकसभा चुनाव की राजनीति ने आदिकाल से होते से रहे अर्द्ध कुम्भ को सत्ता क नें ‘महाकुंभ’ का नाम दे दिया ….ये ‘महा लूट’ का ‘महाकुम्भ’ साबित होगा !
रु.3500 करोड़ का खर्च कई मंत्रियों व नौकरशाहों/इंजीनिअर्स को माला-माल कर जाएगा। प्रयागराज/इलाहाबाद शहर की दीवारों पर पेंटिंग पर रु.27 करोड़ खर्च हो चुका है और काम अभी भी चल रहा है। अर्ध कुम्भ का क्या कुंभ मेले का बजट पूर्व में कभी रु.800-1000 करोड़ से ज्यादा नही रहा। खजाना खाली है, गन्ना किसानों का रु.1800 करोड़ बाकी है। आलू शीतग्रहों में सड़ रहा है, धान खरीद हुई नही, लेकिन अर्द्ध कुम्भ को चुनाव के कारण महाकुम्भ कहते हुए महिमा मंडित कर रु.3500 खर्च हो रहा है। गंगा की सफाई ही करा देते। शहर कूड़े से ढका पड़ा है। लोग भूखों मर रहे है। पूरी सरकार का काम बंद है , सभी मंत्री मुख्यमंत्री सहित इसी काम मे लगे हैं। गंगा मलिन की मलिन है….. कुम्भ के दौरान कानपुर की टैनरिज बंद रहेंगी।
इस सरकार के पास कोई काम नही रह गया है … गाय, गोबर, राममंदिर का ढकोसला… मॅहगाई, बेरोजगारी से किसान, मजदूर सब परेशान है। अब लोग इस सरकार की नौटंकी, आडंबर, झूँठ, जुमले बाज़ी से आज़िज़ आ चुके हैं…. कुछ भी कर लो, अब बदलाव निश्चित है।
ये अर्द्धकुम्भ कहीं ‘महालूट-का-महाकुम्भ’ साबित न हो जाये ….
भाजपा बौखलाहट में है,कुछ समझ नही आ रहा …. वास्तविक विकास, किसान-मजदूरों, बेरोजगारों को राहत देने के स्थान पर ऊलजलूल काम करती जा रही है, अहंकारवश जनता को चिढ़ाने के काम कर रही है। कभी अयोध्या में मंदिर के नाम पर भीड़ को इक्कठा करना…. शहरों के नाम बदलने का दिखावा, सत्ता की लालच में आदिकाल से चले आ रहे माघ मेला-अर्द्धकुम्भ का नाम बदलकर ‘महाकुम्भ’ कर देना ..पूर्व सरकारों के भृष्टाचार की बात तो करते हैं लेकिन कार्यवाही कुछ न करना, SC/ST एक्ट में संशोधन …..
अभी इन्हें समझ नहीं आ रहा … जब तक पूरा डूब नही जाएंगे। ( सुर्य प्रताप सिंह पू०आईएएस की फेसबुक वाल से)

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