गाजीपुर-अचानक कोतवाली पंहुचे आईजी, मचा हड़कंप

गाजीपुर-सैदपुर नगर स्थित कोतवाली परिसर में शनिवार को पुलिस महानिरीक्षक एसके भगत ने अर्धवार्षिक मुआयना किया। मुआयना भले ही अर्धवार्षिक और पूर्व निर्धारित रहा हो, लेकिन इस कदर औचक रहा कि आईजी के आने की सूचना के बाद मातहत हलकान हो गए। आनन फानन में तैयारियां की गईं।

कोतवाली आने के बाद आईजी ने परिसर में साफ सफाई, आरक्षी बैरक, उपस्थिति व ड्यूटी रजिस्टर, आगंतुक रजिस्टर, मालखाना, मेस, कार्यालय अभिलेख, महिला हेल्प डेस्क, सीसीटीएनएस कक्ष आदि का निरीक्षण किया। साथ ही असलहे व कारतूसों की संख्या की जानकारी ली। इसके बाद पुरूष व महिला आरक्षियों से असलहों को डिसमेंटल कराने के साथ ही उन्हें लोड भी कराया और फायरिंग की पोजिशन देखी। कुछ आरक्षी इसमें नाकाम रहे तो उन्होंने झुंड असलहे उठाकर उन्हें बारीकी सिखाई और निर्देश दिया। बीते दिनों से शुरू हुई महिला आरक्षियों समेत पुरूषों की बीट पुस्तिका का भी अवलोकन किया। इसके बाद महिला हेल्पडेस्क पर जाकर रजिस्टर समेत फरियादियों की समस्याएं व उनके निस्तारण की स्थिति देखी। सभी पुलिसकर्मियों से बारी-बारी बातचीत भी की।

उन्होंने समाधान दिवस के मामलों के निस्तारण की भी स्थिति देखी। साथ ही साइबर अपराध के निस्तारण के बारे में भी जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि जिले के जर्जर हो चुके थानों के भवनों को ध्वस्त कराया जाएगा। एसपी को निर्देश देते हुए कहा कि ये थाना 1856 में बना है, ऐसे में जर्जर हो चुके भवनों का ध्वस्तीकरण कराकर नवीन निर्माण का प्रस्ताव भेजा जाए। इसके बाद वैज्ञानिक ढंग से कम जगह में बहुमंजिली इमारत बनाई जाए, ताकि थानों में अधिक से अधिक जगह बचे।

इसके अलावा बताया कि सभी थानों में पड़े मुकदमे या लावारिस वाहनों की नीलामी की प्रक्रिया तेजी से हो। इसके बावजूद जो वाहन बच रहे हैं, उन्हें सुरक्षित रखने के लिए जिले के सभी तहसीलों में जमीन ली जा रही है। ताकि वहां पर वाहनों को रखा जा सके और थाने के जगह का अन्य कार्य मे प्रयोग किया जा सके। उन्होंने पुलिस अधीक्षक रामबदन सिंह को भी आवश्यक निर्देश दिया।

इस मौके पर क्षेत्राधिकारी बलिराम, कोतवाल तेजबहादुर सिंह, एसएसआई घनानंद त्रिपाठी समेत सभी उपनिरीक्षक मौजूद रहे। करीब डेढ़ से दो घण्टे तक मुआयने के बाद उनके वापिस जाने पर मातहतों ने चैन की सांस ली। बता दें कि उनके आने के कुछ देर पूर्व तक कोतवाली में किसी को जानकारी नहीं थी। बल्कि जब कोतवाली में पुलिस कप्तान रामबदन सिंह पहुंचे और बताया तो आनन फानन में परिसर में मैट बिछवाया, साथ ही वहां असलहों व कारतूसों को बाहर निकालकर रखा गया।