गाजीपुर-अमेरिकी चुनाव, ट्रम्प वनाम बाइडन और भारत

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भारतीय स्वभावतः भोले होते हैं! ट्रंप ने ‘नमस्ते भारत’ क्या बोला, बहुतेरे लोगों ने उन्हें सर आंखों पर बिठा लिया! वैसें मैं जानना चाहता हूँ कि अमेरिका के रिपब्लिकन प्रेसिडेंट कब से भारत के हिमायती हो गए!

रिपब्लिकन राष्ट्रपति निक्सन से लेकर जॉर्ज बुश सीनियर तक भारत को आँख दिखाने से कभी बाज नहीं आए। अमेरिका में डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति बनने पर ही भारत से बेहतर रिश्ते देखे गए हैं। राष्ट्रपति क्लिंटन ने भारत के साथ एक नए रिश्ते की शुरुआत कर पूरे विश्व समुदाय को चौंकाया था, राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल के दौरान रिश्ते को नई ऊंचाई दी गयी। रिपब्लिकन राष्ट्रपति ट्रम्प का भारत के पक्ष में कभी चरित्र दिखा ही नहीं! कभी धमकी देना तो कभी भारतीय प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ट्विटर पर फॉलो करना तो अगले ही कुछ दिन बाद अनफॉलो कर देना! एशिया नीति की धुरी माने जाने वाली व्यापार समझौते ‘ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप’ (टीपीपी) से बाहर निकलने के लिये कार्यकारी आदेश पर दस्तख़त करने, वीजा नियमों को सख्त बनाना, नए तरह के आर्थिक नीतियों से भारतीय आईटी कंपनियों को चोट पहुंचाना, जनरलाइज़्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (जीएसपी) कार्यक्रम के तहत लाभ लेने वाले देश के रूप भारत को प्रदान किये गए दर्जे को वापस लेना, ट्रम्प की पॉलिसी ने भारतवंशियों को किस तरह परेशान किया, यह छुपा है क्या?

ट्रम्प ने कुछ किया या नहीं किया, बड़बोलापन से कभी कभी खुश होने का मौका जरूर दिया लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा! हाँ भारत को हथियार ख़ूब बेचा, भारत और अमेरिका के बीच सैन्य व्यापार 22 बिलियन डॉलर पहुंच गया।

बहुतेरे भारतीय भले ही ट्रम्प के हारने पर कुछ असमंजस में हों लेकिन अमेरिका में भारतवंशियों ने खुलकर जो बाइडन को हाथोंहाथ लिया था! अमेरिका में उदारवादी जो बाइडन से न सिर्फ भारत बल्कि विश्व के तमाम देश बेहतर रिश्ते की उम्मीद कर रहे हैं।

-नवीन पाण्डेय के फेसबुक वाल से

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