गाजीपुर-आज भी है पुस्तकालय की सार्थकता

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गाजीपुर-लॉकडाउन में जब सभी विद्यालय बंद हो गये और छात्रों का अधिकांश समय पढ़ाई से दूर खेलों में कटने लगा तब सैदपुर ब्लॉक के पश्चिमी किनारे का अंतिम गांव अहलादपुर के सराय सुल्तान गांव में पूर्व शिक्षक मुखराम यादव ने एक मिनी पुस्तकालय का निर्माण कर बच्चों को निःशुल्क पठन पाठन की व्यवस्था बनाया। आज के दौर में जब शिक्षा का व्यवसायीकरण हो रहा है ऐसे दौर में कुछ लोग हैं जो लोगों को मुफ्त में शिक्षा और किताबें उपलब्ध करा रहे हैं। गांव के जरुरतमंद बच्चों में किताबों के प्रति प्रेम पैदा करने और समय का सार्थक सदुपयोग करने के लिए चार माह पूर्व पेरियार ललई यादव पुस्तकालय का शुभारंभ किया गया है ,जहां जीवन उपयोगी साहित्य, एकांकी, नाटक, व्यक्तित्व विकास समेत संविधान, सरकारी उपक्रम और ज्ञानवर्धक पुस्तकें उपलब्ध है। संस्थापक मुखराम के शिक्षक पुत्र अरविंद यादव ने बताया कि पिताजी के उद्देश्य की पूर्ति के लिए मेरे मित्रों और समाजसेवी ने एनसीआरटी, सीबीएसई और वैज्ञानिक खोजों, कानूनी जानकारी संबंधित पुस्तकों को दान कर बच्चों सहित बड़े बुजुर्गों के लिए उद्देश्यपूर्ण पुस्तकालय बना दिया है। ललई यादव पुस्तकालय पर प्रतिदिन ढेड़ से दो दर्जन बच्चों सहित शाम के समय कई बुजुर्ग आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पुस्तकों का अध्ययन करते है। साफ सफाई और सेनेटाइजर युक्त पुस्तकालय को अन्य गांवों से आकर लोग देखते है और प्रेरणा लेकर जाते है। लोग कहते है कि ऐसे मिनी पुस्तकालयों की स्थापना प्रत्येक गांवों में किया जाना चाहिए। ग्रामीण पुस्तकालयों से हिंदी दिवस और साक्षरता अभियान के प्रसार प्रचार को बल मिलेगा।

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