गाजीपुर-उत्तराधिकारी स्थापित करने को बेचैन पुर्व व वर्तमान माननीय

गाजीपुर-भारतीय राजनीति में अपने उत्तराधिकारीयों को स्थापित करने की बहुत पुरानी परंपरा है। जवाहरलाल नेहरू के बाद स्वर्गीय इंदिरा गांधी, इंदिरा गांधी के बाद स्वर्गीय राजीव गांधी और स्व०राजीव के बाद राहुल गांधी. इसी तरह से स्वर्गीय जगजीवन राम के बाद मीरा कुमार ,स्व०चौधरी चरण सिंह के बाद चौधरी अजीत सिंह और इसके बाद जयंत चौधरी, बीजू पटनायक के बाद उनके पुत्र नवीन पटनायक,स्वर्गीय रामविलास पासवान के बाद चिराग पासवान इस तरह से देखा जाए तो भारतीय राजनीति में उत्तराधिकारीयों को राजनीति मे स्थापित करने की परंपरा काफी पुरानी है। इस रोग से प्रायः सभी राजनैतिक दल के नेता ग्रस्त है.लेकिन हम बात कर रहे हैं गाजीपुर जनपद के नये व पुराने नेताओं की जो पुर्व मे या वर्तमान मे विधायक या सांसद रहे है मेरा अभिप्राय उनसे हैं. गाजीपुर की राजनीति में भी नये पुराने माननीय अपने साथ-अपने-अपने लाडलों को भी राजनीति मे स्थापित करने के लिए बेचैन नजर आ रहे है।आने वाले विधानसभा चुनाव में या तो खुद को या उनके लाड़लो मे से किसी भी विधानसभा का टिकट मिले। रात दिन इसी प्रयास में लगे हुए हैं। दूसरी तरफ तमाम राजनीतिक दलों में उभरते हुए युवा नेता भी दावेदारी करने में किसी से पीछे नहीं है। आने वाले समय में पुराने घाघ नेता अपने उत्तराधिकारीयों को स्थापित करने में सफल होंगे या युवा कार्यकर्ताओं को पार्टी विधानसभा टिकट से नवाजेगी यह तो समय ही बताएगा।यहां लेखक ने जानबूझकर किसी का नाम नहीं लिखा क्योंकि पाठक खुद इतना समझदार है कि सभी नये व पुराने नेताओं व उनके लाड़लो की कुंडली खुद बांच देगा।

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