गाजीपुर-गंगौली, गाजीपुर और डा० राही मासूम रज़ा

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गाजीपुर : डा. राही मासूम रजा को आधुनिक वेद व्यास कहा जाता है। गाजीपुर जनपद का सौभाग्य रहा कि उन्होंने यहां जन्म लिया। अपनी रचनाओं में न केवल इस शहर को बल्कि अपने गांव गंगौली (कासिमाबाद) को भी प्रसिद्धि प्रदान की। उनकी रचनाएं शायद बहुतों के पल्ले न पड़ीं हों लेकिन जब उन्होंने महाभारत सीरियल का जीवंत संवाद लिखा तो नई पीढ़ी तो उन्हें महाभारत के लेखक के रूप में ही जानने लगी। अपने जिले, गांव, शहर की पहचान बनाने और उसे बचाने, बढ़ाने के लिए अधिकांश लोग संघर्ष करने का दिखावा करते हैं। लेकिन जिसने अपनी मेहनत के बल पर इतनी बड़ी पहचान दी उसे ही भुलाने की कोशिश हो रही है,अब उनके गांव के लोग भी उन्हें याद नहीं करते।उन्होंने अपने लेखन में किसी धूर्त- पाखंडी को छोड़ा नहीं। धर्म- जाति के ठेकेदारों को भी नहीं बख्शा।
डा.राही का जन्म दिन हर साल खामोशी से गुजर जाता है । कहीं कोई हलचल नहीं होती कहीं कोई जलसा नहीं होता । किसी को उनकी याद नहीं आती। यहां तक कि उनके अपने गांव गंगौली के लोग भी उनको याद नहीं करते। उनके जन्म दिन या बरसी पर किसी कार्यक्रम आयोजन नहीं होता । राही के जमाने का मंगरा ताल, नील का गोदाम, गांव के मध्य में राही के जमाने के पूर्व से ही अपनी छत बनने का इंतजार करती नूरूद्दीन शहीद बाबा की मजार आज भी उनके लेखनी की याद दिलाते हैं। गांव गड़ही की तुलना उन्होने गंगा से की थी। इनका जिक्र राही ने अपने उपन्यास आधा गांव में किया है। 01 सितंबर 1925 को गंगौली में जन्मे राही। वीर अब्दुल हमीद की जीवनी छोटे आदमी की बड़ी कहानी भी उन्होंने अपने अंदाज में लिखी। उनको अपनी जन्म भूमि गंगौली से कितना प्रेम था। यह उन्होंने अपने लेखन से साबित किया। उन्होंने

लिखा है…… मैं सैयद मासूम रजा आब्दी पुत्र सैयद वशीर हसन आब्दी बहुत परेशान हूं। अक्सर सोचता हूं कि कहां का रहने वाला हूं। मेरा घर गाजीपुर के गांव गंगौली में है या आजमगढ़ के ठेकमा बिजौली में, जिसे मैंने अब तक कभी नहीं देखा। मैं तो गंगौली का ही हूं गंगौली को ही जानता हूं। अपने जमाने की मशहूर पाप सिंगर व राही की पूत्रवधू पार्वती खान के अनुसार वे लोग उनका जन्म दिन मुंबई में अपने घर मनाते हैं।  डा. राही के घर में रहने वाले व रिश्ते में उनके चचा सैयद अबूजर हुसैन ने बताया कि राही साहब जब मुंबई गये दोबारा लौटकर गंगौली नहीं आये केवल एक बार कम्युनिस्ट पार्टी के जलसे में आये थे। उसके बाद फिर कही नहीं आएं लेकिन गंगौली व यहां के लोगों को हमेशा याद करते थे, उनकी भेजी हुई चादर आज भी उनके इमामबाड़े में बिछाई जाती है।  ग्रामीण अनवारुल इस्लाम व सैयद सलमान हैदर अफसोस के साथ कहते हैं डा. राही एक महान व्यक्ति थे उनके वजह से गंगौली को लोग जानते है लेकिन उनके नाम पर गांव में कुछ भी नहीं है। लोगों ने उनके नाम का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया।
पूर्व प्रधान डा मुहम्मद शब्बीर ने बताया कि डॉक्टर राही मासूम रजा को उनके गांव के लोग भूल चुके हैं। उनकी बरसी व जन्मदिन पर कोई कार्यक्रम नहीं होता नो नहीं यार नहीं करते। महाभारत पाठ का लिखने के बाद लोगों ने आधुनिक वेदव्यास की संज्ञा देते हैं हमें गर्व है कि हम उनके गांव से हैं।
डा. मासूम रजा के भतीजे आमिर हुसैन ने कहा मुंबई में वे राही साहब से मिले थे। उनके कहने पर उन्हें कई सीरियलों में काम ही मिला था लेकिन बाद में वह गांव चले आए । राही साहब अपने आप को गंगा का बेटा कहते थे। डा. राही मासूम रजा की दो शादी हुई थी पहली पत्नी से एक बेटी ही है जो अमेरिका के मशहूर चिकित्सकों में से एक है, दूसरी बेटी से नदीम खान हैं जो मुंबई में रहते हैं। उनकी पत्नी मशहूर पॉप सिंगर पार्वती खान है। चार भाइयों में राही साहब तीसरे नंबर पर थे। इन की पांच बहने भी थी। जिनमें से केवल एक छोटी बहन सुरैया बची है, जो इलाहाबाद में रहती हैं।
राही को तभी एहसास था कि वह जिस मंजिल की तलाश में निकले हैं उसमें उनको याद करने की जरुरत कोई नहीं महसूस करेगा। तभी तो उन्होंने कहा था–

निकल पड़ा है मंजिल की जुस्तजूं में राही,

मुड़- मुड़ के देखता है शायद कोई पुकारे”

सौजन्य से-पुर्वांचल टुडे न्यूज डाट.काम

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