गाजीपुर-गैस सिलेंडर होने पर भी लकडी के चूल्हे पर एमडीएम बनाने को मजबूर

गाजीपुर-परिषदीय स्कूलों में मध्याह्न भाजन बनाने के लिए एलपीजी गैस सिलेंडर मौजूद है। इसके बावजूद लगभग सभी स्कूलों में एमडीएम पकाने के लिए मिट्टी का चूल्हा फूंकना पड़ रहा है। एक तरफ चूल्हे के धुएं से छुटकारा दिलाने को सरकार पीएम उज्जवला योजना के तहत नि:शुल्क गैस चूल्हा व सिलेंडर बांट रही है वही दूसरी तरफ एमडीएम में खाना बनाने के लिए गैस चूल्हा होने के बाद भी चूल्हे के धुएं में खाना पकाना पड़ रहा है। सभी विद्यालयों में गैस सिलेंडर व चूल्हा मुहैया होने के बाद भी अधिकांश स्कूलों ने एमडीएम बनवाने के लिए ईंट और मिट्टी का बना लकड़ी का चूल्हा फिर से अपना लिया है। ऐसे में पूरे स्कूल परिसर में खाना बनते समय धुआं ही धुआं दिखाई देता है। चूल्हे पर खाना बनवाने को लेकर शिक्षकों का कहना है कि इसके लिए मिलने वाली कनवर्जन कास्ट काफी कम होती है। लगातार बढ़ती एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत से सिलेंडर खरीद का खर्च कनवर्जन कास्ट के दायरे में नहीं आ पाता है। शिक्षकों का कहना है कि प्राथमिक विद्यालय में प्रति बच्चा 4.97 रुपये व उच्च प्राथमिक विद्यालय में 7.45 रुपये कनवर्जन कास्ट का भुगतान होता है। इसमें अनाज को छोड़ कर सरसों तेल, मसाल, सब्जी, खीर मेवा व दूध की खरीद शामिल है। ऐसे में कनवर्जन कास्ट का पैसा तो सिर्फ सब्जी व मसाला खरीद में ही खर्च हो जाता है। गैस चूल्हे पर खाना बनाए जाने पर हर माह पांच से छह सिलेंडर का खर्च होता है। ऐसे में गैस चूल्हे पर एमडीएम बनवाना काफी मंहगा सौदा साबित होता है। इसीलिए अधिकांश स्कूलों में चूल्हे की लकड़ी पर ही एमडीएम बनाने का कार्य किया जा रहा है। कुछ स्कूलों ने खर्चा पूरा करने को बीच का रास्ता भी निकाला है। इसके तहत दाल सब्जी तो गैस सिलेंडर पर बनवाई जा रही है जबकि रोटी बनाने का काम चूल्हा जला कर होता है।

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