गाजीपुर-जनमानस के स्मृतियों से विलुप्त होते हिन्दी साहित्य के पितामह

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गाजीपुर-आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र की पुण्यतिथि पर समाजसेवी,साहित्यकार अरविन्द कुमार यादव ने उन्हें श्रद्धान्जलि दी तथा उन्हे याद करते हुए बताया कि हिंदी साहित्य में आधुनिक काल की शुरुआत भारतेंदु हरिश्चंद्र से मानी जाती है।काशी की तमाम विभूतियों में से एक भारतेंदु हरिश्चंद्र भी हैं,जो आधुनिक हिंदी के जनक कहे जाते हैं लेकिन वो आम जनमानस से अछूते हैं।इसका एक कारण उनके भवन और कृतियों का प्रचार-प्रसार न होना है तो दूसरा कारण उनके जन्मदिन और पुण्यतिथि पर होने वाली औपचारिकताएं हैं। साहित्य में ”सोच की नींव” रखने वाले अग्रणी साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र असाधारण प्रतिभा के धनी व दूरदर्शी युगचिंतक थे और उन्होंने साहित्य के माध्यम से समाज में सार्थक हस्तक्षेप किया और इसकी शक्ति का उपयोग करते हुए आम जनमानस में जागृति लाने की कोशिश की तथा दरबारों में कैद विधा को आम लोगों से जोड़ते हुए इसे सामाजिक बदलाव का माध्यम बना दिया। भारतेंदु हरिश्चंद्र की आज 136वी पुण्यतिथि है। उनका निधन महज पैंतीस साल की उम्र में हो गया था। हिंदी की विपुल मात्रा और अनेक विधाओं से निपुण हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का पितामह कहा जाता है।हिंदी साहित्य का आधुनिक काल प्रारंभ करने का श्रेय भी हरिश्चंद्र को ही जाता है। हिंदी पत्रकारिता नाट्य और काव्य के क्षेत्र में भारतेंदु हरिश्चंद्र का योगदान काफी रहा है।उन्हें उत्कृष्ट कवि, सशक्त व्यंगकार,सफल नाटककार, जागरूक पत्रकार और ओजस्वी गद्यकार का दर्जा प्राप्त है।भारतेंदु हरिश्चंद्र का जन्म में 9 सितंबर 1850 को उत्तर प्रदेश के काशी में हुआ था।उनके पिता गोपाल चंद्र एक अच्छे कवि थे।

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