गाजीपुर-जमके बरसी स्वाति, पपीहों ने प्यास बुझाया

गाजीपुर-रविवार को सुबह से ही बादलों ने जमकर पानी बरसाया। इस बरसात की आम आदमी से लेकर किसानों को भी इंतजार था लेकिन रविवार की बारिश कुछ ख़ास थी जिसका इंतजार मनुष्यों के साथ-साथ प्रकृति के कई अन्य भी कर रहे थे। रविवार को दोपहर तक स्वाति नक्षत्र में बरसे पानी का महत्व कुछ ज्यादा बढ़ गया। कहा जाता है कि “कदली सीप भुजंग मुख, स्वाति एक गुन तीन” यानी स्वाति नक्षत्र में बारिश की एक बूंद से पपीहा पक्षी अपनी प्यास बुझा लेता है एवं केले के पत्ते पर जल की बूंद गिरने से कपूर बनता है और इसी जल की बूंद समुद्र के सीप में गिरने से मोती बनता है और स्वाति नक्षत्र के जल की बूंद सर्प के मुंह में गिरने से जहर बन जाता है। आकाश में कई मेघ होते है पर सभी एक जैसा नहीं होते प्रत्येक मेघ जल देकर तृप्त नहीं करता है। कोई धरती पर वृष्टि करके उसे तृप्त करेगा तो कोई सिर्फ गरजता भर है। स्वाति नक्षत्र का पानी चातक पंक्षी के लिए जीवन उपयोगी सिद्ध होता है। साहित्य में चातक को प्रतीक्षारत विरही के रूप में प्रस्तुत किया है जिसका वर्षा जल से अटूट रिश्ता बताया जाता है। पपीहा अक्सर शरद ऋतु और बरसात में अपनी मधुर आवाज पिउ-पिउ बोलता है। इसे चातक, पपीहा, चकवा-चकवी आदि नाम से भी जानते है। यह पक्षी मादा के साथ दिन भर जोड़े के रूप में रहता है किन्तु नर-मादा रात बिछुड़कर ही बिताते है और सुबह पुनः इनका मिलन होता है।

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