गाजीपुर-जमानियां का कौन होगा सिकंदर ?

गाजीपुर-वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के सभी छोटे बड़े राजनीतिक दल वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा के चुनाव की तैयारियों में जोर शोर से लगे हुए हैं।अपने इस अभियान के तहत तमाम दलों के नेता कोई सपा से भाजपा में कोई भाजपा से सपा में तो कोई बसपा मे आ रहा है जा रहा है। तमाम छोटे-बड़े दल सत्ता में हिस्सेदारी के लिए एक दूसरे से गठबंधन कर रहे हैं।लेकिन हम बात कर रहे हैं गाजीपुर जनपद के विधानसभा जमानिया की जहां से समाजवादी पार्टी के संभावित विधानसभा प्रत्याशी पूर्व सांसद व पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश सिंह की दावेदारी है तो दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी से परवेज खान पुत्र असलम खान निवासी उसियां की दावेदारी है। भारतीय जनता पार्टी की संभावित उम्मीदवार सुनीता सिंह दोबारा अपनी किस्मत आजमाने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रही हैं। आने वाले चुनाव में जहां समाजवादी पार्टी को भरोसा है कि अल्पसंख्यक समाज का मतदाता समाजवादी पार्टी को मतदान करेगा वहीं दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी के संभावित उम्मीदवार परवेज खान को पूरा भरोसा है कि दलित और अल्पसंख्यक मतों के भरोसे वह विधानसभा जमानिया को फतेह कर लेंगे। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव मे भाजपा की सुनीता सिंह को 76823 मत,बसपा के अतुल राय को 67559 मत,सपा के ओमप्रकाश सिंह को 49556 मत,निर्दलीय करतार सिंह यादव को 12206 मत,जनअधिकार मंच के तौकीर खान को 6139 मत तथा सीपीआई के रामप्यारे को 1081 मत प्राप्त हुआ था। बसपा के संभावित उम्मीदवार परवेज खान व समाजवादी पार्टी के संभावित उम्मीदवार पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश सिंह की जीत हार काफी हदतक अल्पसंख्यक मतदाताओं के हाथ में निर्धारित है। वैसे जमानिया विधानसभा में मुस्लिम ,यादव, कुशवाहा और चमार मतदाताओं की बहुलता है। अब आने वाले समय में देखना काफी रोचक होगा कि अल्पसंख्यक मतदाता समाजवादी पार्टी के पाले में जाता है या बहुजन समाज पार्टी के पाले में जाता है।समाजवादी पार्टी के नेता व कार्यकर्ता स्थानीय स्तर से लगाया प्रदेश स्तर तक अल्पसंख्यक मतों को अपने पक्ष में पड़ने की अनुमान से काफी खुश हैं।बहुजन समाज पार्टी भी खामोश किलर की तरह अपने अभियान में लगी हुई है और वर्ष 2007 के प्रदर्शन को दोहराने के फिराक में है। फिलहाल बहुजन समाज पार्टी वर्ष 2007 के प्रदर्शन को दोहरा पाएगी या नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना तो तय है कि परवेज खान पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश की राह को काफी मुश्किल कर सकते हैं। पुर्व कैविनेट मंत्री के राह मे एक और मुस्किल ओबैसी के पार्टी के उम्मीदवार भी पैदा कर सकते है।वर्ष 2017 मे पुर्व कैविनेट मंत्री की हार की वजह अनेक लोग निर्दलीय उम्मीदवार ददन् पहलवान के सुपुत्र करतार सिंह यादव को मानते है लेकिन दोनों के प्राप्त मतो का योग भी भाजपा उम्मीदवार सुनीता सिंह तथा बसपा उम्मीदवार अतुल राय से कम है।