गाजीपुर-तौबा-तौबा खोदा पहाड़ निकली चुहिया

गाजीपुर- काफी दिनों बाद मेरे प्रिय मित्र बातूनी मियां से आज मुलाकात हो गई। बातूनी मियां जब भी मिलते हैं बिना सिर पैर की कोई ना कोई विस्फोटक खबर दे ही देते हैं।हनुमान मंदिर गोराबाजार के सामने स्थित गुड्डू की चाय की दुकान पर हम बैठे हुए थे कि अचानक बातूनी मियां आ गए। हम और बातूनी मियां चाय की चुस्की लेने लगी, उसी समय बातूनी मियां ने बातों का सिलसिला शुरू करते हुए बताया कि जब भी निजाम बदलता है तो सिस्टम मे उथलपुथल होता है। वह निजाम राजनैतिक हो, धार्मिक हो ,सांस्कृतिक हो या प्रशासनिक हो जब भी बदलता है तो पुराने सिस्टम में उथल-पुथल होता है। बेसिक शिक्षा विभाग में आए हुए नए साहब ने जनपद से कई खंड शिक्षा अधिकारियों को गैर जनपद के लिए कार्यमुक्त किया तो कई नए आए हुए खंड शिक्षा अधिकारियों को नए ब्लॉक आवंटित करने के साथ ही कई पुराने खंड शिक्षा अधिकारियों को अन्य विकास खंडों में स्थानांतरित कर दिया।जनपद मे वर्षों से जमे खण्ड शिक्षाधिकारियों ने नये विकास खण्ड मे शिक्षकों से आसानी से अपना तालमेल विठा लिया। लेकिन गैर जनपद से आए हुए नए खंड शिक्षा अधिकारियों ने जब कार्यभार ग्रहण किया तो विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया शुरू किया।निरीक्षण में अनुपस्थित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी करना शुरू कर दिया। वैसे तो परिषदीय विद्यालय में 80% शिक्षक इमानदारी से अपना कार्य करते हैं लेकिन 20% शिक्षक ऐसे हैं जो शिक्षक होने के बावजूद अपनी आय बढ़ाने के लिए या अपनी नेतागीरी चमकने के लिए स्कूलों से दुर रहते है और विद्यालय पर हफ्ता 15 दिन में 1 दिन जाते हैं और सभी दिन की हाजिरी लगा के चले आते हैं।स्वाभाविक है कि नए खंड शिक्षा अधिकारियों के औचक निरीक्षण से ऐसे शिक्षकों में खलबली मचनी स्वभाविक थी।ऐसे शिक्षकों ने संगठनों के माध्यम से नए खंड शिक्षा अधिकारियों पर अवैध धन उगाही का आरोप लगाकर बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्रक देना शुरू किया।बेसिक शिक्षा अधिकारी ने ऐसे पत्रको पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया।जनपद मे पहली आग लगी मरदह वाली मैडम के खिलाफ।वहां से उठी आग की चिंगारी जा पहुंची करण्डा में।नए खंड शिक्षा अधिकारी ने विद्यालयों का जब औचक निरीक्षण शुरू किया तो विद्यालय न जाने वाले 20% शिक्षकों ने खंड शिक्षा अधिकारी पर अवैध वसूली का आरोप लगाते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी महोदय को पत्रक दे दिया।यहां तक तो बात ठीक थी क्योंकि मामला विभाग तक सिमित था। लेकिन इसी दौरान सजातीय कर्मचारी नेता ने राणा प्रताप के अंदाज में सजातीय खंड शिक्षा अधिकारी मे इतना हवा भर दिया कि खंड शिक्षा अधिकारी को लगा कि जब जनपद का राणा प्रताप मेरा सजातीय है तो कोई मेरा क्या बिगड़ लेगा।मामला थोड़ा और आगे बढ़ा तो शिक्षक नेता ने अपने हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के दरबार में जान-माल की रक्षा की गुहार लगाई। इसी बीच में पंडित जी भी हनुमान स्टाईल मे गदा भांजते हुए शिक्षक नेता के पक्ष मे कूद गए। पंडित जी ने भी जलती हुई आग में जमकर धी डाला। मामला जब काफी तूल पकड़ने लगा और दोनों को लगा इस बेमतलब की जंग दोनों मे दोनों शहीद हो जायेंगे तो दोनों ने आपस मे समझौता करना ही उचित समझा।इसी दौरान गोराबाजार स्थित एक शिक्षक नेता के घर हुए धार्मिक आयोजन के बाद हुए भोज में जब दोनों मिले तो दोनों ने एकदूसरे से अपने गिले शिकवे को दुर करते हुए एक दूसरे से गले मिले।दोनों को गले मिलते हुए सैकड़ों शिक्षकों ने देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।हमारी और बातूनी की बात-बात करते-करते चाय खत्म हो गयी और दोनों एकदूसरे को नमस्कार करते हुए बिदा हो गये लेकिन जाते-जाते बातूनी मिंया कहते गये “तौबा-तौबा खोदा पहाड़ निकली चुहिया “।