गाजीपुर-धरम्मरपुर पुल का एप्रोच मार्ग दोषी कौन ?जे.ई.या ठेकेदार

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गाजीपुर-आप यदि शासन सत्ता से जुड़े हुए किसी मंत्री या विधायक के करीबी हैं तो आपको जनता के द्वारा टैक्स के रूप में दिए गए सरकार को धन को लूटने का पूरा अधिकार है, और आपका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता है।जमानियाँ नगर पालिका को विकासखंड करंडा के गांवों से जोड़ने वाला गंगा नदी पर दो दशकों के बाद बने पक्के पुल के एप्रोच मार्ग के निर्माण को देखकर लगाया जा सकता है। पक्के पुल का एप्रोच मार्ग पक्के पुल से धरम्मरपुर तिराहे तक आता है, उसके निर्माण में इतनी लापरवाही हुई है की गंगा नदी की बाढ़ को घटने के 1 सप्ताह बाद भी उस पुल पर पहुंचने का प्रयास करना आत्महत्या करने के बराबर है।सरकार के धन से बनने वाले किसी भी निर्माण कार्य का स्टीमेट, निर्माण इकाई का जूनियर इंजीनियर बनाता है और उसके निरीक्षण के बाद सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता एप्रुवल देकर चीफ अभियंता के पास भेजते है। इसके बाद चीफ अभियंता उसे लखनऊ के प्रमुख अभियंता के पास भेजते है।इस संपर्क मार्ग का स्टीमेट बनाने वाले जे.ई. ने गलत किया या ठेकेदार ने अधिक बचत करने के लिए मानक/स्टीमेट को नजरअंदाज किया यह जाँच का बिषय है। इस अनियमिता /मानक के बिपरीत कार्य करने वाले के खिलाफ बैधानिक कार्यवाही हेतू ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को एक पत्रक सौंपा है। अब देखना काफी रोचक होगा कि शासन सत्ता भारी पडता है या लोकहित ?

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