गाजीपुर-नियमित व्यायाम एवं उचित आहार सयाटिका का बेहतर इलाज है-डा०बी.के.यादव

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गाजीपुर-सायटिक का रोग एक स्याटिक नस में सूजन के कारण उत्पन्न होने वाला रोग है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को असहनीय दर्द होता है। जो कमर से दर्द होते हुए दोनों पैरों या एक पैर के पिछले भाग में नीचे की तरफ होता है। इसको गृध्रसी भी कहते हैं। जो गिद्ध की चाल के समान व्यक्ति की चाल को दर्शाता है।सयाटिका रोग सामान्यतः 50 वर्ष की उम्र के बाद व्यक्ति में देखने को मिलता है। किंतु कभी-कभी 20 वर्ष तक के उम्र वालों ने भी देखने को मिलता है।व्यक्ति में जहां-जहां जोड़ होता है वहां चिकनी सतह होती है। जो हड्डीयों को जोड़े रखती हैं। जब यह चिकनी सतह घिसने लगती है तो यह असहनीय दर्द का कारण बन जाती है। सयाटिका रोग स्याटिक नस से सम्बन्धित है। जिसका कोर्स (क्षेत्र) कमर की रीढ़ की हड्डी से कमर और पैर का पिछला भाग होता है। अतः स्याटिक नस के दबाव से कमर व पैर के पिछले भाग में असहनीय दर्द, पैरों में झुनझुनाहट,सुन्नपन रहता है। अगर व्यक्ति किसी सामान को सिर पर रखकर कुछ दूर चलता है या आगे की तरफ झुक कर कार्य करता है तो साइटिका का दर्द बढ़ जाता है।अतः इन व्यक्तियों को चाहिए कि आगे की तरफ ना झुके एवं सिर पर सामान न रखें। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को डॉक्टर के पास जाकर अपनी समस्या बताकर डाक्टर के परामर्श से दवा लेना चाहिये। डा के परामर्श द्वारा एक्सरसाइज भी बहुत लाभकारी होता है। सामान्यतः 85-90% व्यक्तियों को आराम मिल जाता है। कुछ व्यक्तियों में सर्जरी की भी आवश्यकता पड़ती है।

लेखक-डा०बी.के.यादव जखनियां गाजीपुर

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