गाजीपुर-महामारी को निमंत्रण देता त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव

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गाजीपुर-आखिर यह संस्थाएं किसके लिए हैं।यह विचार मन में तब उत्पन्न हो रहा है जब कोरोना महामारी का भयानक रुप दिख रहा है या संभवतः और भयानक रुप अभी भविष्य के गर्भ में हो।संक्रमण और मौतें उनके लिए संख्या है जिनके अपने उपर नहीं बीत रही है।बावजूद इसके परिचितों, रिश्तेदारों, मित्रों के मामलों में तो कोई अछूता नहीं है।
अब इस दौर में किसी तरह का चुनाव तो आग में घी डालने जैसा ही है।खासतौर से पंचायत चुनाव के तो कहने ही नहीं।दरवाजे-दरवाजे प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम पंचायत सदस्य पद के उम्मीदवार घूम रहे हैं, वह भी अकेले नहीं समूह में।कोई उन्हें मना नहीं कर सकता, रोक नहीं सकता।जुलूस निकाले जा रहे हैं।सामूहिक भोज भात का दौर चल रहा है।प्रवासी मतदाताओं को आमंत्रित किया जा रहा है।लगन और संभावित लाकडाउन के कारण भी प्रवासी मजदूर, पटरी व्यवसायी, प्राइवेट नौकरी वाले गांवों में लौट रहे हैं।कर्मचारियों को एफआईआर का डर दिखाकर चुनावी ड्यूटी कराई जार रही है।जिन परिस्थितियों में प्रशिक्षण, नामांकन, नो ड्यूज,बैंक चालान के कार्य हो रहे हैं वह आज के हालातों में किसी सामूहिक आत्मघात से कम नहीं है।
कोरोना के फैलाव के लिए इससे अधिक कोई अनुकूल परिस्थिति हो सकती है तो वह वैज्ञानिक बता सकते हैं।
उच्च न्यायालय, प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग को इन परिस्थितियों पर गौर करते हुए कोरोना के काबू होने तक पंचायत चुनाव टाल देना चाहिए, ऐसा मेरा मत है।
लोकतंत्र लोगों के लिए, लोगों द्वारा है न कि लोगों को मारने के लिए। (अविनाश प्रधान के फेसबुक वाल से)

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