गाजीपुर-पकौड़ी से प्याज और गायब समोसा से आलू

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गाजीपुर-भारतीय व्यंजनों में पकौड़ी और समोसे का बड़ा महत्व है। पकौड़ी समोसा गांव के नुक्कड़ चौराहों से लेकर पांच सितारा होटलों तक में आसानी से उपलब्ध रहता है। समोसे और आलू का चोली दामन का रिश्ता है। आलू के बगैर समोसे की कल्पना भी नही किया जा सकता है। आलू की बढ़ती कीमतों ने समोसे के अंदर से आलू को गायब कर दिया है। समोसा दिन रात बिकने वाला लोकप्रिय व्यंजन है जिसे लोग मीठी-तीखी चटनी और चना-मटर के छोले के साथ बड़े चाव से खाते है। आलू प्याज की कीमतों से परेशान नाश्ता विक्रेताओं ने समोसे के अंदर आलू कम और ब्रेड के टुकड़े और पकौड़ी डालकर बना रहे है। कई ग्राहकों ने दुकानदारों के इस चालाकी पर टोका टाकी भी कर रहे है। दुकानदारों ने बताया कि पांच रुपये का समोसा आठ रुपये में बेचने के बाद भी आलू की कीमत निकाल पाना मुश्किल हो रहा है। कई दुकानदारों ने समोसा बनाना बंद कर ब्रेड पकौड़ा और चना मसाला ग्राहकों को दे रहे है। पकौड़ी बनाने वाले दुकानदारों ने भी पकौड़ी में महंगे प्याज डालने के बजाय मूली और पालक बैंगन के टुकड़ों के साथ पकौड़ी बना रहे है।

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