गाजीपुर-पीसीएस के परीक्षा परिणाम पर फर्जी बिधवा बिलाप

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गाजीपुर-कुछ दिन पूर्व उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा वर्ष 2017 के प्रकाशित हुए परीक्षा परिणाम को लेकर अनाप-शनाप सवाल उठा रहे हैं और आयोग की निष्पक्षता पर भी उंगली उठा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि लोक सेवा आयोग की निष्पक्षता और सरकार की मंशा पर सवाल उठाने वालों को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार के मामले में दिए गए फैसले का अध्ययन करना चाहिए।आरक्षण के विवाद से संबंधित एक मामले मे 17 सितंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति नागेश्वर राव व हेमंत गुप्ता के खण्ड पीठ के जजमेंट को तथा जस्टिस आर भानुमति एवं ए०एम० खानविल्कर के द्वारा केरल के एक मामले में दिए गए फैसलों का अध्ययन करने बाद ही कोई टिप्पणी या आरोप लगाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में एक बात को बार-बार स्पष्ट किया गया है कि यदि आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार सामान्य वर्ग के उम्मीदवार से अधिक अंक लाता है तो वह सामान्य वर्ग की श्रेणी में चयनित होने के लिए पात्र है, लेकिन इसमें शर्त यह है कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार ने आरक्षण के तहत आयु,परीक्षा शुल्क, शैक्षिक योग्यता या अन्य कोई छूट नहीं लिया हो। अब सवाल यह उठता है कि आरोप लगाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थों के अधिक अंकों को तो देखते हैं लेकिन उन्हें यह पता नहीं होता आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी ने परीक्षा शुल्क, आयु या शैक्षिक योग्यता में छूट लिया है कि नहीं ? यदि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी ने इनमें से कोई भी छूट प्राप्त किया है तो उसका चयन सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी से अधिक अंक होने के बाद भी नहीं होगा।

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