गाजीपुर-बीजेपी से गठबंधन कभी नहीं-ओमप्रकाश राजभर

गाजीपुर-भारतीय राजनीति में कौन सा दल कब और किसके साथ गठबंधन कर लेगा और कब गठबंधन से अलग हो जायेगा यह कोई नहीं जानता।कभी भाजपा और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी में गठबंधन हुआ और फिर सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के विवादित बयानों के चलते दोंनो दलों मे तलाक भी हो गया।एक बार फिर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव होने का समय आ रहा है और सत्ता प्राप्त करने के लिये विभिन्न राजनैतिक दल गंठजोड़ बनाने मे लगे हुए है।

रविवार 13 जून 2021 को ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा के साथ फिर से गठबंधन करने से इन्कार कर दिया। कहा कि ‘भविष्य में बीजेपी के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा। हम बीजेपी के किसी नेता के संपर्क में नहीं हैं और अभी तक किसी बीजेपी नेता ने मुझसे संपर्क भी नहीं किया है। भाजपा विधानसभा चुनाव से पहले पिछड़े वर्गों और दलितों के नेताओं को लुभाने की कोशिश कर सकती है। आरोप लगाया कि भाजपा ने पिछड़े नेताओं को पीछे छोड़ दिया और यहां तक कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भी सरकार में “अनदेखा” किया गया। उन्होंने बीजेपी को ‘भारतीय झूठ पार्टी’ करार देते हुए कहा, ‘बीजेपी ने पिछड़े वर्ग को धोखा दिया है और आने वाले चुनाव में सरकार की विदाई तय है। 2017 के विधानसभा चुनाव में एसबीएसपी ने आठ सीटों पर चुनाव लड़ा और चार पर जीत हासिल की। राजभर को कैबिनेट मंत्री बनाया गया, लेकिन बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इस दौरान लोकसभा चुनाव के दौरान सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों में काफी तल्‍खी बनी रही और आपसी विवादित बयानों की वजह से दोनों दलों के बीच दूरियां लगातार बढ़ती गईं। सुभासपा ने पूर्वांचल में एआइएमआइएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के साथ बीते कुछ माह पूर्व चुनावी दौरा कर चुके हैं। बिहार के बाद पूर्वांचल में पैर जमाने में जुटी ओवैसी की पार्टी के लिए सुभासपा भी जमीन तैयार कर रही है। पूर्वांचल के महत्‍वपूर्ण जिलों में मुस्लिम बहुल सीटों पर ओवैसी की पकड़ को देखते हुए सुभासपा ओवैसी के साथ ही फ‍िलहाल नजर आ रही है। जबकि सुभासपा की पकड़ पूर्वांचल में ही अधिक है। ऐसे में अन्‍य दलों के लिए यह गठजोड़ चुनौती भी पेश कर सकती है। दूसरी ओर भाजपा से संबंध खराब होने के बाद आपसी तल्‍ख बयानों ने भी वापसी की संभावनाएं खत्‍म की