गाजीपुर-भारतीय समाज भी कट्टरता की तरफ बढ रहा है-माधव कृष्ण

गाजीपुर-पाकिस्तान में गणेश मंदिर पर हमला कर, इस्लामिक कट्टरपंथियों ने तस्लीमा नासरीन के उपन्यास लज्जा के उस हिस्से की याद दिला दी जिसमें बांग्लादेश में ऋषि सम्प्रदाय के 400 परिवारों को इस्लामिक कट्टरपंथियों ने रातों रात खत्म कर दिया था।

यह घटना भारत के लिए महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि धर्म या जाति, किसी के भी नाम पर कट्टरता अंततः विनाश की ओर ले जाती है। फिर कोई विकास, भूख इत्यादि की बात नहीं करता। इस्लाम के नाम पर बना पाकिस्तान, आज विश्व का सर्वाधिक सुखी देश होना चाहिए था, लेकिन उसकी आर्थिक दशा और उसके अपने लोगों की आतंकी घटनाओं में मृत्यु यह सिद्ध करती है कि उग्रता व कट्टरता अंत में स्वयं को निशाना बनाती है।

पुराणों में कथा है कि द्वारकाधीश श्रीकृष्ण को मारने के लिए एक राजा ने एक कृत्या को भेजा। कृत्या एक तरह की राक्षसी है जिसके अंदर द्वेष करने वाले के द्रोह, कट्टरता, क्रोध की शक्ति भर जाती है। वह श्रीकृष्ण का कुछ नहीं बिगाड़ सकी, तो उसने उस राजा को उसके परिवार और नगर समेत समाप्त कर दिया।

कट्टरता वही कृत्या है। सभी काफिरों को मारने के बाद, अंत में किसे निशाना बनाएगी यह कट्टरता! सूफियों को, शिया को, अहमदिया को और फिर आपस में ही खत्म कर देगी पूरे समाज को।

चिन्ता की बात यह है कि अब भारत में भी कट्टरता हावी हो रही है। भीमा कोरेगांव, अखलाक, चुनावोपरान्त बंगाल हिंसा जैसी घटनाएं सिद्ध कर रही हैं कि धर्म, जाति और विचारधारा के नाम पर भारतीय समाज कट्टरता की तरफ बढ़ रहा है। आवश्यकता है कि इन तत्वों को हाशिये पर रखा जाय और स्वयं सजग रहा जाए, अन्यथा पाकिस्तान जैसी दुर्दशा होने में देर नहीं होगी।

माधव कृष्ण