गाजीपुर-राजभरों को विमुक्त जाति का दर्जा देने की माँग

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गाजीपुर। भर/राजभर जाति को विमुक्त जाति (एस.टी.) का पूर्ण आरक्षण की मांग को लेकर राजभर समाज के लोगों ने सरजू पांडेय में सोमवार को धरना दिया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि हमारी जाति भर/राजभर जाति की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक स्थिति काफी दयनीय है। आजादी के 70 साल के बाद भी हमारी जाति बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर है। हमारी जाति को पिछड़े वर्ग की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन पिछड़े को 27 प्रतिशत आरक्षण का पूरा फायदा हमकों नहीं मिल पाता। पिछड़े वर्ग की मजबूत जातियां इस आरक्षण का फायदा उठाती आ रही है। कबा कि हमको शासनादेश सं.-899(ए)-26-700(5)-1959 तथा 12 मई 1951 द्वारा नियुक्त जाति की मान्यता दी गई है। शासनादेश सं.-899(5)-26-700 तथा 12 मई 1961 द्वारा अनुसूचित जाति के रूप में मान्यता दी गई। शासनादेश सं.-1432/26-3-86-11 (वि.सं.) 86 दिनांक 10 जुलाई 1986 द्वारा अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त है। इसको विमुक्त जाति का प्रमाणपत्र जारी किया जाता, लेकिन नौकरी में एवं अन्य सुविधाएं जो एस.टी. जातियों को मिलती, हमकों नहीं मिलती। यह हमारे समाज के साथ बहुत बड़ा अन्याय होता आ रहा है। हम लोग बार-बार लोकतांत्रिक तरीके से धरना के माध्यम से शासन-प्रशासन को अपनी मांग प्रेषित करते है, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अंत में मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। इस अवसर पर प्रधान आकाश राजभर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मुन्नीलाल राजभर, बृजराज राजभर, शिवबली राजभर, मुसाफिर राजभर, धर्मेंद्र राजभर, चंद्रहास राजभर, सीताराम राजभर, त्रिलोकी राजभर, रामनरायण राजभर, रामसूरत राजभर, नंदू राजभर, राधे राजभर, चंचल राजभर, लल्लन राजभर आदि मौजूद रहे।

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