गाजीपुर-शेर जब दो कदम पीछे हटता है तो- – -कृषि कानून

गाजीपुर-भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने जब से तीनों विवादित की कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा किया है। तबसे पूरे देश में किसान आंदोलन के समर्थकों और किसान आंदोलन के विरोधियों में अलग-अलग एक बहस छिड़ी हुई है। जहां मोदी के समर्थक जगह-जगह चट्टी,चौराहों और चाय-पान के दुकान पर चाय की चुस्की लेते हुए यह कहते हुए टहल रहे हैं कि शेर जब दो कदम पीछे हटता है तो इसका मतलब यह नहीं होता है कि शेर ने हार मान लिया,इसका मतलब यह होता है कि वह पहले से भी लंबी छलांग लेगा। समर्थकों के कहने का मतलब यह है कि मोदी जी ने कृषि कानूनों को वापस लेने का जो फैसला किया है उसके तह में कोई न कोई बडा राजनैतिक खेल छुपा हुआ है। जिसे विपक्षी दल समझ नहीं पा रहा है। वहीं दूसरी तरफ किसान आंदोलन के समर्थक व मोदी विरोधी यह कह रहे है कि 7 साल के अपने शासनकाल में भारत के प्रधानमंत्री पहली बार बैकफुट पर आए हैं और किसानों के आंदोलन के आगे उनको झुकना पड़ा। यह लोकतंत्र और किसानों के संघर्ष की जीत है। वास्तविकता क्या है ? यह प्रधानमंत्री मोदी जी की कोई राजनैतिक चाल है या अंत:करण से लिया गया फैसला, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन शेर जब दो कदम पीछे लेता है तो इसका मतलब वह इससे भी बड़ी छलांग लेगा यह लोगों और चट्टी चौराहों पर खासा चर्चा का बिषय बना हुआ है।

Also Read:  गाजीपुर-रिकॉर्ड मतों से हराऊंगा प्रतिद्वंद्वी को-अफजाल अंसारी