गाजीपुर-सुभाष पासी वनाम शशि सोनकर

गाजीपुर- नगर पंचायत सैदपुर के पूर्व चेयरमैन शशि सोनकर ने बुधवार को लंबे समय से चले आ रहे राजनैतिक संस्पेंस को खत्म करते हुए आखिरकार सपा का दामन थाम लिया और बसपा छोड़ सपा के खेमे में चले गए। उन्हें लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एमएलसी आशुतोष सिन्हा व पूर्व विधायक सिबगतुल्लाह अंसारी की मौजूदगी में सपा की सदस्यता दिलाई। सदस्यता ग्रहण करने के बाद उन्होंने सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव से आशीर्वाद भी लिया।

अखिलेश व डिंपल यादव के वैवाहिक वर्षगांठ पर बसपाई से सपाई हुए शशि सोनकर ने उन्हें बड़ा तोहफा दिया। शशि को बसपा से सपा में लाने का श्रेय पूर्व विधायक सिबगतुल्लाह अंसारी व सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा को जाता है। क्योंकि कुछ ही दिनों पूर्व सिबगतुल्लाह ने भी बसपा छोड़ सपा का दामन थामा था और शशि सोनकर अंसारी बंधुओं के बेहद करीबी माने जाते हैं। ऐसे में उनका भी सपा में जाना लगभग तय हो गया था। लेकिन इसके कयास कई दिनों से चल रहे थे। शशि बीते कुछ दिनों से सपा के कई कार्यक्रमों में भी दिखई दिये थे। यहां तक कि अखिलेश यादव के पखनपुरा आगमन पर वो उनके स्वागत में भी गए थे। पूर्व चेयरमैन के पार्टी बदलने को अलग नजरिए से भी देखा जा रहा है। क्योंकि शशि सोनकर सैदपुर की सुरक्षित विधानसभा सीट से विधानसभा का चुनाव भी लड़ना चाहते हैं और बसपा में रहते हुए उनकी दावेदारी मजबूत नहीं थी। ऐसे में सपा में आने का उनका ये भी बड़ा कारण हो सकता है। क्योंकि सैदपुर के वर्तमान विधायक सुभाष पासी ने सपा छोड़कर सपा की तरफ से प्रत्याशी की बड़ी जगह खाली कर दी है। ऐसे में अब इस सीट पर कई दिग्गज नेताओं की नजर आकर टिक गई है। कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि आने वाले दिनों में शशि सोनकर सैदपुर सीट से सपा की तरफ से विधानसभा चुनाव लड़ते दिखें। क्योंकि उनकी सैदपुर में राजनैतिक जमीन भी पहले से ही तैयार है, तो विधानसभा चुनावों में उनको इसका लाभ भी मिलेगा। हालांकि सपा के पास अभी सैदपुर सीट से चुनाव लड़ने के दावेदारों की कमी नहीं है, लेकिन सपा को भाजपा के सुभाष पासी को टक्कर देने लायक कोई कद्दावर प्रत्याशी की तलाश थी। शशि सोनकर सपा के उस खांचे में भी फिट बैठते दिख रहे हैं। बहरहाल, भविष्य क्या होगा, ये आने वाले समय में दिखेगा। लेकिन शशि सोनकर के सपा में आ जाने से अब सुभाष पासी को कड़ी टक्कर जरूर मिलेगी। बता दें कि पहली बार 2007 में निकाय चुनाव निर्दलीय लड़कर पूर्व चेयरमैन हार गए थे। जिसके बाद 2012 में अंसारी बंधुओं के विलय हो चुके कौमी एकता दल से चुनाव लड़कर पहली बार वो चेयरमैन बने। 2017 में अंसारी बंधुओं के बसपा में जाने पर वो भी बसपा को हो लिए और एक बार फिर से अपनी पत्नी सरिता सोनकर को चेयरमैन बनाया।

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