गाजीपुर-हाथरस की घटना से सबक

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गाजीपुर-ऐसे मुद्दों पर कुछ लिखने से परहेज करता हूँ जिनमें ठोस साक्ष्य न हों। जांच एजेंसियों के निर्णय से पहले ही अनेक निर्णय जनता पर थोपे जाने लगते हैं, चैनलों के, अखबारों के, नेताओं के, नुक्कड़ बुद्धिजीवियों के। इनमें मेरा स्कोप नहीं। इसीलिए न सुशांत पर लिखा और न हाथरस पर। लेकिन मेरे कुछ समाजवादी और कोंग्रेसी मित्रों की जिद्द है कि मैं हाथरस पर लिखूँ। दरअसल पार्टी विशेष से लगाव होने पर लोगों को यह समस्या होती है।

कुछ उदाहरण, मेरे एक भाजपा के भक्त थे, लेकिन निजीकरण में फंसने पर वह खासे भाजपा विरोधी हो चुके हैं। मेरे एक कांग्रेसी मित्र धारा 370 पर कांग्रेस विरोध देखकर कांग्रेस विरोधी हो गए। मेरे एक समाजवादी मित्र बलात्कारी लड़कों के बारे में अपने नेता जी के प्रसिद्ध वक्तव्य को देखकर सपा विरोधी हो गए। कम्युनिस्ट मित्र को कहीं से ज्ञान मिला कि सुभाषचंद्र बोस को कम्युनिस्ट नेता तोजो का कुत्ता कहते थे, वे भी एन्टी कम्युनिस्ट हो गए।

तो ऐसे सभी मित्रों से आग्रह है कि गांधी जी की यह बात याद रखें कि संसदीय प्रणाली वेश्या की तरह है। यहां पर एक आदमी को इस बात का हक़ नहीं कि वह अपनी पार्टी की नीतियों के खिलाफ बोल सके।

तो इस संदर्भ में सभी को वेश्यागमन से बचते हुए, पार्टी के बजाय नीतियों का समर्थन या विरोध करना चाहिए। पार्टी की नीतियों का मूल्यांकन कीजिये, और मुद्दा आधारित समर्थन या विरोध कीजिये।

अब आते हैं हाथरस पर। यहां कुछ बातें संदिग्ध हैं:

  1. शव का बिना परिवार की सहमति के जलाया जाना। इससे इस बात को बल मिलता है कि किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति की सहमति थी।
  2. राहुल और प्रियंका को रोकने की कोई वजह नहीं थी। विपक्ष अपना काम करेगा, और उसे करने देना चाहिए। यदि वे शांतिपूर्ण ढंग से मिल लेते, तो यह प्रजातांत्रिक मूल्यों की समर्थक सरकार दिखती।
  3. मीडिया और नेताओं को परिवार से न मिलने देना, और अब मिलने देना, अपरिपक्वता नहीं तो और क्या है।
  4. बलात्कार इस देश की सच्चाई हैं। हुआ या नहीं, यह बाद की बात है, लेकिन जरा सा भी अंदेशा हो तो सरकार और पोलिस को इसे छिपाने की बजाय त्वरित कार्रवाई करनी चाहिये ताकि तुरंत न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
  5. राहुल और प्रियंका गांधी ने इसी समय राजस्थान में हुए बलात्कार पर अशोक गहलोत को क्या निर्देश दिया, वहां के परिवारों से क्यों नहीं मिले? क्या बलात्कार पर उनकी संवेदना भाजपा शासित राज्यों में ही है? अगर हां, तो राजनीति इतनी नहीं गिरनी चाहिए।
  6. लड़कों से गलतियां हो रही हैं और ऐसे लड़कों को 6 महीने के अंदर आजीवन जेल में रखने की तैयारी हो, सरकार और न्यायपालिका को सुनिश्चित करना पड़ेगा।

माधव कृष्ण के विचार

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