जौनपुर-प्रशासन की उदासीनता बनी दो बहनों के मौत का कारण

जौनपुर। गुरुवार की सुबह सगी बहनों की धारदार हथियार से हत्या की जघन्य घटना ने कुकरिहांव (हरखपुर) गांव में दहशत का माहौल बन गया है। पूरे परिदृश्य पर गौर करें तो पुलिस व प्रशासन की उदासीनता इस नृशंस हत्याकांड की वजह बन गई। पूर्व में हुए विवाद व थाना दिवस पर पड़े प्रार्थना पत्र पर सरकारी अमले ने गंभीरता दिखाते हुए प्रभावी कार्रवाई की होती तो शायद ऐसी घटना न होती।

उक्त गांव के स्वर्गीय जगदीश पांडेय के पांच पुत्र अलग-अलग रहते हैं। सबसे छोटा दिव्यांग पुत्र पवन अपनी मां सुभद्रा देवी के साथ रहता है। ग्रामीण बताते हैं कि जिस पुश्तैनी जमीन को लेकर यह घटना हुई, उसका अभी बंटवारा होना बाकी था। आपसी समझौते से चार भाई अपने-अपने हिस्से में खेती-बाड़ी करते थे। पवन ने अपना हिस्सा छोड़ दिया था। सबसे बड़े पुत्र रमाशंकर व दूसरे नंबर के शिवशंकर मुंबई में रोजी-रोटी कमाकर परिवार की आजीविका चलाते हैं। रमाशंकर का पुत्र आशीष खेत में शौचालय बनवाना चाहता था। शिवशंकर के बेटे-बेटियों का कहना था कि पहले बंटवारा हो जाए फिर वह अपने हिस्से की चक में शौचालय बनवाए। वर्ष 2020 में भी रमाशंकर व शिवशंकर के परिवार में मारपीट हुई थी। तब रमाशंकर के पुत्र आशीष ने तहरीर देकर जतिन व सूरज के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। दोनों पक्ष तब से कई बार समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र दे चुके थे। पुलिस व प्रशासन के गंभीरता से न लेने के कारण विवाद नहीं सुलझ सका था। आशीष व उसकी पत्नी हमेशा बंटवारे के लिए अक्सर समाधान दिवस पर थाने का चक्कर लगाते रहे।

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विवाद के चलते आशीष हमेशा तनावग्रस्त रहता था। शौचालय बनाने की जिद में आशीष के सिर पर मानो खून सवार हो गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह पूर्णिमा व अंकिता के दम तोड़ने तक शरीर पर तब तक बांका से प्रहार करता रहा। जतिन का कहना है कि आशीष ने उस पर भी हमला किया, किंतु वह भागकर जान बचाने में सफल हो गया। ग्रामीण बीच-बचाव न करते थे और कुछ और लोगों की जान जा सकती थी।

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दोनों बहनों की हत्या के बाद जतिन पांडेय उर्फ बंटी बेसुध हो गया है। वह मुंबई से माता-पिता के आने की बाट जोह रहा है। बेटियों की हत्या की खबर के बाद माता-पिता हवाई जहाज से आ रहे हैं। बड़ी बहन पुष्पा जब घर पर पहुंची तो भाई से लिपटकर रोने लगी। भाई-बहन का करुण-क्रंदन हर किसी का कलेजा चाक कर रहा है। मुंबई में कार चलाने वाले शिवशंकर पांच बेटियों में तीन पूनम, पूजा व पुष्पा की शादी कर चुके थे। मृत पूर्णिमा व अंतिमा अविवाहित थीं।

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