बसपा- चुनाव से पहले भाई चारा , चुनाव बाद बेचारा

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गाजीपुर-बहुजन समाज पार्टी के चुनावी रणनीति का एक अहम हिस्सा है , चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी अनेक जातियों को अपने पार्टी से जोडने के लिये भाईचारा समितियों का गठन करती है। उदाहरण के लिए बिन्द भाईचारा समिति, यादव भाईचारा समिति, कुशवाहा भाईचारा समिति, अल्पसंख्यक भाईचारा समिति, ब्राम्हण भाईचारा समिति, क्षत्रिय भाईचारा समिति आदि का गठन करती है। इन भाईचारा समितियों मे अध्यक्ष उसी जाति का होता , लेकिन सचिव का दलित होना अनिवार्य होता है। प्रत्येक बुथ पर ये भाईचारा समितियाँ बुथ कमेटी का गठन करती है। प्रत्येक बुथ कमेटी मे बुथ अध्यक्ष उसी जाति का होता है ,जिस जाति की भाईचारा समिति ह़ोता है लेकिन सचिव दलित होता है और अन्य तीन सदस्य अध्यक्ष की जाति के होते है। भाईचारे की बुथ कमेटीयाँ अपनी – अपनी जाति के मतदाताओं को बसपा से जोडने का काम करती है। इस तरह से प्रत्येक बुथ पर बहुजन समाज पार्टी दस से बारह बुथ कमेटी रन करती है। यही है बहुजन समाज पार्टी की शोसल इंजीनियरिंग , लेकिन बहुजन समाज पार्टी चुनाव सम्पन्न होने के बाद सभी भाईचारा कमेटीयों को भंग कर , भाईचारा समितियों के कार्यकर्ताओं को बेचारा बना देतीं है।

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