लखनऊ-अब सरकार का गंगा एक्सप्रेस-वे पर ध्यान

लखनऊ- अभी तक उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय पूर्वांचल एक्सप्रेस वे और उसका लोकार्पण था। लेकिन प्रदेश सरकार अब पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के बाद गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण पर अपना पूरा फोकस कर रही है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पूर्व ही गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य का शुभारंभ हो हो जाए। गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 जिलों मेरठ, हापुड, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर , हरदोई, उन्नाव ,रायबरेली, प्रतापगढ़ से होते हुए प्रयागराज से होकर गुजरेगा।

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यह एक्सप्रेस-वे सिक्स लेन चौड़ा और आठ लेन विस्तारित होगा। एक्सप्रेस वे के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य प्रगति पर है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए राज्यस्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन अधिकरण ने शनिवार को पर्यावरणीय मंजूरी जारी कर दी। भारत सरकार की अधिसूचना के तहत इस तरह की परियोजनाओं का निर्माण शुरू करने से पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी जरूरी होता है।अब शीघ्र ही गंगा एक्सप्रेस वे के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य प्रारंभ हो सकेगा।

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इस एक्सप्रेस- वे परियोजना की कुल अनुमानित लागत 36230 करोड़ रुपए है।इस परियोजना के विकास के लिए पीपीपी मोड पर डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस आपरेट एंड पद्धति पर निविदाएं आमंत्रित की गई है।गंगा एक्सप्रेस-वे 594 किलोमीटर लंबा और पूरी तरह से प्रवेश नियंत्रित होगा। मेरठ-बुलंदशहर मार्ग पर मेरठ के बिजौली ग्राम के पास से प्रारंभ होकर प्रयागराज बाईपास पर जुड़ापुर दांदू गांव के पास समाप्त होगा।

एक्सप्रेस वे के लिए 94% भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। इस एक्सप्रेस-वे के अंतर्गत 140 नदी, धारा, नहर और नाला शामिल है। इसके 7 आरओबी, 17 इंटरचेंज ,14 बड़े पुल ,126 छोटे पुल, 28 फ्लाईओवर,946 छोटी पुलीयों का निर्माण किया जाना है। निर्माण के समय लगभग 12 हजार व्यक्तियों को अस्थाई रूप से काम मिलेगा। टोल प्लाजा के निर्माण से लगभग 100 व्यक्तियों को अस्थाई रखा जाएगा।

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