लखनऊ-अर्श से फर्श पर बाबू सिंह कुशवाहा

“एक #जमाना था जब #उत्तरप्रदेश में #बाबू सिंह कुशवाहा की #तूती बोलती थी”

दौर था वर्ष 2007 से 2012 का जब उत्तरप्रदेश में बसपा की सरकार थी और उस सरकार में कैबिनेट मंत्री हुआ करते थे #बाबू सिंह कुशवाहा जो कि मायावती के काफी विश्वासपात्र थे तब बाबू सिंह कुशवाहा ने भी सरकार में मंत्री रहते हुए उत्तरप्रदेश में #पिछड़ो व #दलितों को हकमारी बन्द कर उनके लिए सरकारी संस्थाओं के दरवाजे पूर्णतः खोल दिए साथ ही राज्य में महत्वपूर्ण पदों पर उनकी नियुक्ति भी करवाई, उनमे से कुछ तो ऐसे भी थे जिनकी हालत काफी दयनीय थी, बाबू सिंह कुशवाहा की छत्रछाया में आते ही रातोरात फर्श से अर्श पर पहुँच गए, उत्तरप्रदेश की राजनीति में ऐसा भी समय आया जब उत्तरप्रदेश में सभी लालबत्ती, निली बत्ती व जिला पंचायत आदि महत्वपूर्ण पद बाबू सिंह कुशवाहा के रहमो करम से बनने लगे, बाबू सिंह कुशवाहा ने भी इसका खूब फायदा उठाया और राज्य में पिछड़ो और दलितों को आर्थिक, समाजिक व राजनैतिक सुदृढ़ करते रहे इसतरह वो बसपा में मायावती के बाद सबसे बड़े नेता के रूप में उभर के सामने आए,

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देश की राजनीति में एक समय ऐसा भी आया जब मायावती देश की PM की रेस में पहुँच गई तो बात उत्तरप्रदेश में इसबात की चर्चाएं होने लगी कि उत्तरप्रदेश के अगला CM कौन होगा ? तो सबसे पहला नाम आया बाबू सिंह कुशवाहा का; बस यही से जन्म होता है बाबू सिंह के दुश्मनों का जिन्होंने कलांतर में उन्हें NRHM घोटाले तथा डॉक्टरों की हत्या में फंसाकर जेल भिजवा दिया,

पिछड़े व दलितों की सेवा का परिणाम बाबू सिंह कुशवाहा को यह मिला की बिना अपराध के लगभग 4साल तक जेल में रहें अंत मे न्यायालय ने अपराध मुक्त पाने के बाद 2016 में जेल से रिहा कर दिया, अपने नेता के दीदार के लिए गाज़ियाबाद के डसना जेल के बाहर सैकड़ो गाड़िया व हजारों समथर्क उनके स्वागत के लिए खड़े थे, जैसे ही बाबू सिंह कुशवाहा जेल से बाहर निकले समर्थको ने बाबू सिंह कुशवाहा जिंदाबाद-जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिया पूरा इलाका बाबू सिंह कुशवाहा जिंदाबाद के नारों से गूंज रहा था, बाबू सिंह कुशवाहा अपने समर्थकों के साथ लखनऊ के लिए निकल पड़े पूरे रास्ते मे उत्तरप्रदेश के बड़े नेता जगह-जगह स्वागत करते रहे व अपने व बाबूसिंह समर्थकों के साथ बाबू सिंह कुशवाहा की करवा में शामिल होते गए, करवा अब लखनऊ पहुँच चुका था, अब करवा में शामिल थे 2000 चार पहिया वाहनों ने लखनऊ को लगभग 3 घंटे तक जाम कर दिया व पूरा लखनऊ देर रात तक बाबू सिंह कुशवाहा जिंदाबाद के नारों से गूंजता रहा और अपने नेता से मन ही मन कहता रहा, क्यों काट दिए वो 4साल का लम्बा समय #काल-कोठरी में वो भी हमारी भलाई के ऐवज में,

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कलांतर में बाबू सिंह ने अपनी पार्टी बनाई JAP जिसने 2017 का उत्तरप्रदेश चुनाव लड़ा लेकिन बीजेपी द्वारा केशव प्रसाद मौर्य को अघोषित मुख्यमंत्री घोषित किये जाने के कारण #मौर्य(सैनी,शाक्य व कुशवाहा) समाज के साथ अन्य पिछड़ा वर्ग का एकमुश्त वोट बीजेपी को चला गया व बाबू सिंह कुशवाहा को कोई भी सफलता नही मिली,

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आज फिर 2022 की राजनीति विसात बिछाई जा रही है लेकिन इसबार कुशवाहा समाज सतर्क भी है और अपने नेता के साथ चलने को तैयार भी है, लेकिन दौर है गठबंधन का और बाबू सिंह कुशवाहा का गठबंधन किस पार्टी से होता है यह तो भविष्य की गर्त में छुपा है!

लेकिन आज #समाज(पिछड़े व दलित) और मैं जानना चाहता है कि बाबू सिंह कुशवाहा के रहमो करम पर #धनाढ्य सामंत बनने वाले आज किस बिल में घुस गए है कि, आज वो मुश्किल वक्त में बाबू सिंह के साथ दिखाई नही देते, वह सभी या तो अपनी अमीरी में मस्त है या भोगविलास में!

खैर वर्तमान में वांछित समाज जाग चुका है और कह रहा है कि “चुप चाप-JAP छाप-जय बाबू सिंह कुशवाहा”

आपका सूर्यवंशी #राजेश कुमार मौर्य गाजीपुर, उत्तरप्रदेश