लखनऊ-राजनैतिक दलों की महिला मतदाताओं पर मेहरबानी या दिखावा

लखनऊ- उत्तर प्रदेश में चुनाव आते ही आधी आबादी यानी महिला मतदाताओं पर राजनीतिक दलों की मेहरबानी दिखाई देने लगती है।महिला मतदाताओं के खातिर एक से बढ़कर एक राजनैतिक दलों द्वारा एलान किए जा रहे है।कांग्रेसियों का सारा ध्यान महिला वोटरों पर ही है। कांग्रेस ने महिलाओं को आकर्षित करने की जबरदस्त कोशिशें शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश प्रभारी की प्रभारी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पहले ही एलान कर चुकी है कि उनकी पार्टी ने महिलाओं के लिए एक अलग घोषणापत्र तैयार किया है। प्रियंका महिलाओं से जुड़ा कोई भी मौका हो ट्वीट करने का कोई मौका नहीं छोड़ती है। उन्हें उम्मीद है कि इन महिलाओं के जरिए कांग्रेस के दिन फिर सकते हैं। उनकी भाषा इसी बात का संकेत देती है। प्रियंका ने अपने ट्वीट में लिखा उत्तर प्रदेश की मेरी प्यारी बहनों आपका हर दिन संघर्ष से भरा है कांग्रेस पार्टी ने इसे समझते हुए अलग से एक महिला घोषणा पत्र तैयार किया है। कांग्रेश पार्टी की सरकार बनने पर साल भर में तीन रसोई गैस का सिलेंडर मुफ्त दिया जाएगा, प्रदेश की सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा का प्रबंध होगा।कांग्रेश बहुत सालों से उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर है उसने एक के बाद एक कई फार्मूले अजमा लिए हैं अब नया फार्मूला महिला वोटरों का है। कांग्रेस को लगता है कि उसके इन हथकंडे से उसके पक्ष में महिलाओं के समर्थन की आधी शुरू हो जाएगी और उनका काम आसान हो जाएगा। कांग्रेस ने महिलाओं की खातिर थोक के भाव में ऐलान किया कि सरकार बनने पर आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 10 हजार प्रति मांह किया जाएगा। आरक्षण के प्रावधानों के अनुसार 40% महिलाओं की नियुक्ति की जाएगी, वृद्ध एवं विधवा महिलाओं को 1000 रु० प्रति माह पेंशन दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश की वीरांगनाओं के नाम प्रदेश भर में 75 दक्षता विद्यालय खोला जाएगा। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में 40% सीट महिला उम्मीदवारों को देने का ऐलान किया है। उत्तर प्रदेश की छात्र छात्राओं को स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक स्कूटी देने की भी घोषणा कांग्रेस महासचिव कर चुकी है।

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दूसरी पार्टियां भी महिलाओं को लुभाने के अभियान में जुटी हुई है ।भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में भी महिलाओं के लिए सौगात के पिटारा खोलने की बात कही जा रही है। पार्टी ने विधानसभा चुनाव का घोषणा पत्र तैयार करने के लिए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में नौ सदस्यों वाली समिति का गठन किया है और कमेटी से कहा गया है कि वह महिलाओं के हक में आकर्षक प्रस्तावों को रूप दे। समाजवादी पार्टी भी इस मामले में पीछे नहीं रहना चाहती, सपा के भीतर डिंपल यादव की अगुवाई में महिला वोटरों को साधने की जबरदस्त रणनीति बनाई जा रही है ।सपा जल्द ही महिलाओं के लिए बड़ी सौगात ओं का ऐलान कर सकती है। सपा ने पहले ही ऐलान कर दिया कि 2022 में सपा की सरकार बनती है तो यूपी की बृद्ध और विधवा महिलाओं को 500 नहीं 2000 रू० प्रतिमा दिया जाएगा।आगामी विधानसभा में विधानसभा का चुनाव फतह करने के लिए बहुजन समाज पार्टी ने भी खास रणनीति तैयार की है ।इस रणनीति के तहत महिलाओं को आकर्षित करने के लिए सतीश चंद्र मिश्रा की पत्नी कल्पना मिश्रा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी 28 और 29 नवंबर को वाराणसी में महिला सम्मेलन की शुरुआत करेगी और यह सम्मेलन इसके बाद लगातार प्रदेश में जारी रहेगा। इस सम्मेलन में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार एवं उनके सम्मान के लिए विचार विमर्श किया जाएगा। लेकिन महिलाओं को लेकर राजनैतिक दल कितने गंभीर हैं इसका एक छोटा सा उदाहरण आपके सामने प्रस्तुत करना चाहूंगा। जब वर्ष 2008 में तत्कालीन विधि मंत्री एच आर भारद्वाज ने राज्यसभा में नया और बेहतर महिला आरक्षण बिल पेश किया तो उसे यूपीए के सहयोगी दलों के मुखिया लालू प्रसाद यादव और मुलायम सिंह यादव ने राज्यसभा में बिल पर चर्चा से पहले ही उसे छीनने और फाड़ने की कोशिश की। उस वक्त कुछ महिला सांसदों ने भारद्वाज के चारों ओर एक छोटा सा घेरा बनाकर उन्होने बिल को बचाया।बिल स्टैंडिंग कमेटी को भेजा गया। राज्यसभा में यह बिल फिर दोबारा पेश होता मगर उससे पहले ही सपा और राजद ने यूपीए से समर्थन वापस ले लिया।बि्ल तो किसी तरह राज्यसभा से पारित हो गया मगर अगले 4 साल तक लोकसभा से पारित नहीं कराया जा सका।

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