वाराणसी-विश्वनाथ धाम लोकार्पण, पीएम का एक तीर से कई निशाने

वाराणसी. काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण समारोह एक तरह से 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होने जा रहा है। अगर कहें कि वाराणसी के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने इस दौरे से एक तीर से कई निशाने साधने वाले हैं। वजह साफ है कि पीएम न केवल अपने ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण के जरिए यूपी 2022 विधानसभा चुनाव को साधेंगे बल्कि वह अपने संसदीय क्षेत्र से 2022 में ही होने वाले पंजाब चुनाव को भी साधने की कोशिश करेंग।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह वाराणसी आने वाले हैं। इस दौरान वह अपने ड्रीम प्रोजेक्ट विश्वनाथ धाम का लोकार्पण करेंगे। लेकिन उस दौरान पीएम केवल विश्वनाथ धाम का लोकार्पण ही नहीं करेंगे बल्कि 1514.02 लाख की लागत से सीरगोवर्धन के पर्यटन विकास कार्य का भी लोकार्पण करेंगे। वहां चल रहे विकास कार्यों का मुआयना करने के लिए ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गत 28 नवंबर को सीरगोवर्धनपुर पहुंचे थे और संत रैदास की प्रतिमा के आगे मत्था टेका था।

यहां ये भी बता दें कि सीरगोवर्धनपुर स्थित संत गुरु रविदास महाराज का जन्म स्थान है। इस पवित्र स्थली का जुड़ाव पंजाब और हरियाणा से भी है। पंजाब से बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं। खास तौर पर माघी पूर्णिमा यानी आज से एक पखवारे बाद यहां मेला लगेगा। पंजाब से संत शिरोमणि रैदास के अनुयायी तो पहुंचेंगे। कई दिनों तक यहां समारोह चलेगा। इस तरह से पीएम को संत रैदास के अनुयायियों को माघी पूर्णिमा से पहले ही प्रधानमंत्री बड़ी सौगात देंगे।

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी 13 दिसंबर से शुरू हो रहे अपने वाराणसी के दो दिवसीय दौरे के दौरान संत रविदास मंदिर पहुंचकर यूपी से पंजाब को भी साधने की कोशिश कर सकते हैं। वजह साफ है कि रैदासिया समुदाय का ये बड़ा पवित्र स्थल है और यहां से पंजाब के रैदासियों का आत्मीय लगाव है। ऐसे में अगले साल होने वाले यूपी और पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी और भाजपा के लिए ये तुरुप का पत्ता साबित हो सकता है।

वैसे बता दें कि माघी पूर्णिमा पर काशी संत रैदास मंदिर का हालिया भारतीय लोकतंत्र के चुनावी समीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान हो चुका है। भले ही इसकी शुरूआत बसपा प्रमुख मायावती ने की हो। यहां ये भी बता दें कि मायावती ही रहीं जिन्होंने सबसे पहले संत रविदास जन्म स्थली के कायाकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मायावती 2004 के बाद से संत रविदास की जन्म स्थली के कायाकल्प को लेकर लगातार सक्रिय रहीं।