सहारनपुर-पीएम की घोषणा का सभी दलों ने किया स्वागत, कहा कानूनों के वापसी के बाद ही हटें किसान

सहारनपुर. उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र की भाजपा सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करते हुए बड़ा दांव खेला है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में किसानों समेत देशवासियों की नब्ज टटोलने का प्रयास किया है। वहीं, विपक्षी दलों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। साथ ही दोनों सदनों में प्रस्ताव पास होने पर ही किसान आंदोलन समाप्ति की बात कही है। विपक्ष का साफ-साफ कहना है कि चुनाव के बाद भाजपा दोबारा से बिल ला सकती है।

सपा बोली-कृषि बिल की वापसी के बाद ही आंदोलन खत्म हो-
सहारनपुर नगर विधानसभा सीट से सपा विधायक संजय गर्ग ने कृषि कानूनों की वापसी पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा है कि यह किसानों की जीत और भाजपा के अहंकार की हार है। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में 750 किसानों ने शहादत दी, जिसके बाद यह जीत मिली है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पर तब तक भरोसा नहीं कर सकते हैं, जब तक कृषि कानून दोनों सदनों में वापस न हों। क्योंकि किसानों का आंदोलन समाप्त होने के बाद भाजपा चुनाव के बाद फिर से कृषि बिल ला सकती है।

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उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान किसानों को आंदोलनजीवी और खालिस्तानी से लेकर आतंकी तक कहा गया था। लेकिन, अब सड़कों पर आंदोलन करने वालों को भाजपा ने किसान माना है। उन्होंने कहा कि 14 दिन में गन्ना भुगतान का दावा करने वाली सरकार गतवर्ष तक का गन्ना भुगतान नहीं कर सकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सिर्फ कॉरपोरेट का हित देखती है। साथ ही कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराना है, तो गठबंधन करना ही होगा।

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बसपा ने बताया चुनावी स्टंट-
इसी कड़ी में बसपा के के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कृषि कानूनों की वापसी को चुनावी स्टंट बताया है। उन्होंने मोदी सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने उस समय कृषि कानूनोंं को वापस क्यों नहीं लिया, जब कई किसानों ने किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाई थी। देश भर के किसानों को कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन करते हुए साल भर से अधिक हो गया। अब चुनाव नजदीक आ रहे हैं तो भाजपा को अचानक कृषि कानून वापसी की याद आ जाती है। उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े करते हुए अंदेशा जताया कि हो सकता है कि चार महीने में चुनाव हैं। इसलिए हो सकता है कि तीनों कानूनों को चार माह के लिए वापस लिया गया हो। वहीं, बसपा सांसद फजलुर्रहमान ने कृषि कानूनों की वापसी को किसानों के संघर्ष, साहस और बलिदान की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि एमएसपी से जुड़ी समस्याओं का निस्तारण भी जरूरी है।

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