सपा +बसपा के सम्भावित गठबंधन से , भाजपा में बेचैनी

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लखनऊ- उत्तर प्रदेश की राजनीति मे बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी एक दुशरे के कट्टर बिरोधी माने जाते है। यह बिरोध उस समय शुरु हुआ जब समाजवादी पार्टी के कुछ दबंग कार्यकरताओं ने गेस्ट हाउस मे मायावती को जला कर मार डालने का प्रयास किया। गेस्ट हाउस प्रकरण के बाद बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनो एक दुशरे के कट्टर दुश्मन हो गये। लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के बाद , पुरे देश मे भाजपा , अटलबिहारी बाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की लोकप्रियता जब चरम पर थी तो उस समय उत्तर प्रदेश मे बसपा सुप्रीमो कांशीराम और सपा सुप्रीमो मुलायम सिह के मध्य एक गठबंधन हुआ। उस गठबंधन ने भाजपा के विजय रथ को उत्तर प्रदेश रोक दिया था। उस समय एक नारा फिजाओं मे गुंजायमान था ” मिले मुलायम कांशीराम , हवा में उड गये जयश्रीराम ” । उत्तर प्रदेश के कुल मतदाताओं मे लगभग 20 % पर समाजवादी पार्टी और 20 % मतदाताओं पर बसपा का कब्जा है। वर्ष 2019 के लोकसभा चूनाव मे बसपा और सपा का गठबंधन होगा की नहीं , यह अभी दुर की कौडी है लेकिन सपा व बसपा के सम्भावित गठबंधन से भाजपा नेताओं का अभी से पसीना छुट रहा है। भाजपा नेताओं की बौखलाहट , उनके बयानों से स्पष्ट महसूस किया जा सकता है। दुशरी तरह बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी को यदि उत्तर प्रदेश मे अपने वजूद को बचाये और बनाये रखना है तो दोनो की मजबूरी है गठबंधन।

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