Ghazipur news:कौन सही पुर्व के या वर्तमान के जिला विद्यालय निरीक्षक

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गाजीपुर- जनपद के सिंचाई विभाग में चपरासी से बाबू के पद पर हुए प्रमोशन में होने वाली धांधली उजागर होने के बाद डीआईओएस यानि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय अब सुर्खियों में आ गया है। यहां भी प्रमोशन में बहुत बड़ा गड़बड़ झाला यानि खेल हुआ है। हालांकि इस खेल का ठीकरा जिम्मेदार अधिकारी अपने सर पर नहीं फूटने दे रहे हैं। प्रमोशन से जूडा पूरा मामला एनआईसी और ट्रिपल सी की परीक्षा के मध्य आकर अटक गया है। वर्तमान जिला विद्यालय निरीक्षक जहां बिना एनआईसी में टंकण की परीक्षा कराए ही ट्रिपल सी की डिग्री को मान्यता देकर करीब 7 से अधिक चपरासियों का प्रमोशन बाबू के पद पर कर दिया है। वहीं पूर्व के जिला विद्यालय निरीक्षक ने अपने कार्यकाल के दौरान एनआईसी मे टंकण की परीक्षा देने के बाद ही चपरासियों को प्रमोशन की लिस्ट में जगह दिया। अब सवाल यह उठता है कि वर्तमान जिला विद्यालय निरीक्षक ने शासनादेश का पालन किया या फिर पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक ने शासनादेश का पालन किया है। पूर्व के जिला विद्यालय निरीक्षक ओपी राय के कार्यकाल के दौरान भी चपरासी से बाबू के पद के लिए प्रमोशन हुआ।उन्होंने प्रमोशन लिस्ट में शामिल करने से पहले जिला के एनआईसी विभाग में संबंधित पात्र अभ्यर्थी की टंकण की परीक्षा कराई, और जो अभ्यर्थी उस परीक्षा में पास हुआ उसे ही बाबू के पद पर प्रमोट करने के योग्य माना।इसे आप इस प्रकार समझें की जिसने 1 मिनट में 25 शब्द को टाइप कर दिया उन्हीं अभ्यर्थियों को बाबू के पद पर प्रमोशन मिला। बीते वर्ष 2022 के जुलाई माह में वर्तमान जिला विद्यालय निरीक्षक अशोक नाथ तिवारी ने यहां कार्यभार संभाला तब से अब तक करीब 7 या 8 चपरासियों का बाबू के पद पर प्रमोशन हो चुका है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इनमें से किसी भी अभ्यर्थी का टंकण की परीक्षा नहीं कराई गई, फिर भी उन्हें प्रमोशन देकर बाबू बना दिया गया ।वर्तमान जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा प्रमोशन लिस्ट जारी करना शासनादेश के अनुरूप है या फिर गलत यह तो सिर्फ विभाग के उच्चाधिकारी ही बता सकते हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि चपरासी से बाबू की प्रोन्नति के दौरान विभाग में धनलक्ष्मी का बड़ा खेला हुआ है। सूत्रों की माने तो प्रति कैंडिडेट 2 पेटी का सौदा करने के बाद ही अभ्यर्थियों को प्रमोशन का प्रमाण मिला है।इनमें कहां तक सच्चाई है यह तो विभाग के लोग ही बता सकते हैं लेकिन इतना जरूर है कि प्रमोशन के खेल में पेटी का खेल हुआ है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय हमेशा से अपनी कारस्तानीयों को लेकर चर्चा में बना रहा है और बना रहेगा। कभी पदोन्नति की फाइल गायब कर दी जाती है तो कभी माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्ति को लेकर यह विभाग सुर्खियों में बना रहता है।वर्तमान में बोर्ड परीक्षा में केंद्र निर्धारण को लेकर भी विभाग की काफी किरकिरी हुई है, फिर भी इस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी सुधारने है।इस संदर्भ मे जब मिडिया ने जिला विद्यालय निरीक्षक से सम्पर्क किया तो उन्हें बताया कि ” पहली बात तो यह है कि वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की फाइल बनती है।चपरासी से बाबू बनने के लिए ट्रिपल-सी की परीक्षा पास करना जरूरी है।यहां सवाल टाइपिंग परीक्षा की है तो जब किसी के पास ट्रिपल-सी का प्रमाण पत्र होगा तो उसे टंकण की परीक्षा देने का कोई सवाल ही नहीं उठता है।चपरासी से बाबू पद पर हुए प्रमोशन के दौरान कोई गडबडी नहीं हुई है।नियमानुसार प्रमोशन किया गया है।साभार-डीएनए

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