Ghazipur news:क्या वोटों के ध्रुवीकरण के लिए यह सब हो रहा है

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गाजीपुर-पिछले एक हफ्ते से सोशल मीडिया ट्विटर और टीवी पर देख रहा हूं कि सनातन धर्म बनाम पिछड़ा व शूद्र काफी जोर-शोर से चल रहा है।इस बेवजह के महाभारत की शुरुआत बिहार के शिक्षा मंत्री के बयान से हुई।उस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाना पहचाना नाम स्वामी प्रसाद मौर्य रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों को लेकर के अपने मन की भड़ास निकाली। इसके बाद क्या था ? स्वामी प्रसाद मौर्य के इस पर उनपर हिंदू विरोधी और सनातन धर्म विरोधी,तुलसीदास जी रचित रामचरित मानस के अपमान का आरोप लगाते हुए भलाबुरा कहा जाने लगा।बात यहां तक बढी की स्वामी प्रसाद मौर्या के समर्थन में ओबीसी महासभा के कुछ लोगों ने लखनऊ मे प्रतीकात्मक रामचरितमानस की प्रतियां जलाया।इस कृत्य के खिलाफ कुछ लोगों ने धार्मिक भावना को आहत करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी।पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद 10 में से 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इसी बीच समाजवादी पार्टी की नई कार्यकारिणी की घोषणा होती है और स्वामी प्रसाद मौर्या को सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राष्ट्रीय महासचिव का पद दिया जाता है।इससे प्रयागराज के साधु संत काफी आक्रोशित होते हैं और अखिलेश यादव को हिंदू धर्म से बहिष्कृत करने की घोषणा करते हैं।इसी दौरान एक धार्मिक समारोह में आयोजकों द्वारा अखिलेश यादव को आमंत्रित किया गया था वहां कुछ तथाकथित हिंदू संगठन के लोग या हिंदू समुदाय के लोगों के द्वारा अखिलेश यादव को उस कार्यक्रम में शामिल नहीं होने दिया गया और विरोध किया गया। इसके बाद अखिलेश यादव द्वारा एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि मैं उत्तर प्रदेश के विधानसभा के सदन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से सवाल पूछूंगा कि क्या हम लोग तो शुद्र हैं ? कुल मिलाकर प्रदेश के वर्तमान माहौल को देखते हुए ऐसे लग रहा है कि देश के सभी राजनैतिक दल वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए जोर- शोर से मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने में लगे हुए हैं। आने वाले 2024 के लोकसभा चुनाव में किस प्रदेश में किस दल की क्या स्थिति होगी यह तो आने वाला समय ही बतायेगा तथा 2024 मे दिल्ली में किस राजनीतिक दल की सरकार बनेगी।लेकिन कुल मिलाकर राजनीतिक दलों के इस ध्रुवीकरण के खेल से देश, समाज और दुनिया में एक गलत संदेश जा रहा है जो अच्छी बात नहीं है। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप से आमजन अछूते अपने-अपने काम में मस्त और व्यस्त हैं।यह लेखक के अपने बिचार है आप सहमत या असहमत हो सकते है।

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