Ghazipur news:बिजली विभाग के 1332 हड़ताली संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त

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लखनऊ।उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आरपार की लड़ाई लड़ने के मूड में दिखाई रहे हैं। बिजली कर्मचारी गुरुवार रात दस बजे से 72 घंटे की सांकेतिक हड़ताल पर हैं।जिलों में अलग-अलग जगहों पर इकट्ठे होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।वाराणसी के भिखारीपुर इलाके में बिजली कर्मचारियों ने इकठ्ठा होकर सरकार को सद्बुद्धि आने के लिए यज्ञ किया।बिजली कर्मचारियों की मांग है कि सरकार ने उनसे कुछ दिनों पहले जिन 14 मांगों पर समझौता किया था उन्हें लागू किया जाए।

विद्युत कर्मचारियों ने तीन दिन की हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को दावा किया कि हड़ताल का राज्य के कुछ हिस्सों में बिजली आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ा है। बिजली कर्मचारियों ने टकराव दूर करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप की मांग भी की।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबंधन अधिकारियों की हठधर्मिता के कारण हड़ताल हुई।हड़ताल का बिजली आपूर्ति पर व्यापक असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि अनपरा, ओबरा और पारीछा में ताप बिजलीघरों की पांच इकाइयां ठप हो गई हैं।

शैलेंद्र दुबे ने आरोप लगाया कि ताप बिजलीघरों के प्रबंधन ने हड़ताल में हिस्सा नहीं ले रहे विद्युत कर्मियों को भले ही भूखा-प्यासा रखकर लगातार 16 घंटे तक काम लिया, लेकिन वह बिजली इकाइयों को चला नहीं पाया।दुबे ने दावा किया कि अनपरा में 210 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयां, ओबरा में 200 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयां और पारीछा में 210 मेगावाट क्षमता की एक इकाई ठप हो गई है।इसका बिजली आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ा है।बिजली कर्मियों के न होने से प्रदेश के कई जिलों में वितरण प्रणाली चरमरा गई है।

बता दें कि बिजली कंपनियों में चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के चयन और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी गुरुवार रात 10 बजे से तीन दिन की हड़ताल पर हैं। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने हड़ताल पर कड़ा रुख अपनाते हुए काम पर नहीं आने वाले संविदा कर्मियों को बर्खास्त करने और प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ होने पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।

हड़ताल का आह्वान करने वाली विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक दुबे ने गुरुवार को बताया था कि प्रदेश के करीब एक लाख विद्युत कर्मी गुरुवार को रात 10 बजे से तीन दिन की हड़ताल पर चले गए हैं।दुबे ने कहा था कि अनपरा, ओबरा, पारीछा और हरदुआगंज विद्युत संयंत्रों में गुरुवार की रात्रि पाली के सभी कर्मचारी, कनिष्ठ अभियंता और अभियंता हड़ताल पर चले गए हैं। ताप बिजलीघरों में रात्रि पाली में पूर्ण हड़ताल हो गई है।

शैलेंद्र दुबे ने कहा था कि प्रदेश में करीब 23 साल बाद बिजली कर्मियों की पूर्ण हड़ताल हो रही है।दुबे ने कहा कि तीन दिसंबर 2022 को प्रदेश सरकार और बिजली कर्मियों के बीच समझौता हुआ था।सरकार की तरफ से ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने समझौते के बिंदुओं को लागू करने के लिए 15 दिन का समय मांगा था।हालांकि, अब तीन महीने से ज्यादा वक्त गुजर चुका है, लेकिन समझौते पर अमल नहीं हुआ है।

शैलेंद्र दुबे ने कहा कि सरकार ने समझौते में कहा था कि बिजली कंपनियों के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक का चयन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित एक समिति के जरिए ही किया जाएगा, लेकिन इस व्यवस्था को बंद करके अब इन पदों पर स्थानांतरण के माध्यम से तैनाती की जा रही है, जो टकराव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।

मिली जानकारी के अनुसार बलिया जिले के कोतवाली क्षेत्र में गुरुवार की रात बिजली कर्मचारियों की हड़़ताल के दौरान शहर की बिजली आपूर्ति दुरुस्त करते समय एक निजी कर्मचारी हाईटेंशन तार की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। कर्मचारी को गंभीर हालत में स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसे वाराणसी रेफर कर दिया गया।आज पत्रकार वार्ता मे प्रदेश के उर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि 1332 हड़ताली संविदाकर्मियों की सेवा समाप्त किया गया है।

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