Ghazipur news : गाजीपुर में यहां है कबीर दास के गुरु रामानंद की मठ

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गाजीपुर-सैदपुर ब्लाक में गंगा नदी किनारे पटना गांव स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व समेटे स्वामी रामानंद मठ को पर्यटन एवं आध्यात्मिक केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा। महान सूफी संत कबीरदास जी के गुरु स्वामी रामानंद जी द्वारा सात सौ वर्ष पूर्व स्थापित यह मठ आज भी आस्था और आध्यात्म के साथ योग विद्या का महत्वपूर्ण केंद्र है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधीय प्रशासन, आयुष राज्यमंत्री डॉ दयाशंकर मिश्र ने इस मठ को विकसित करने का निर्णय लिया है। भक्तिकालीन युग के महान स्वामी रामानंद जी अपने भ्रमण काल के दौरान पटना गांव के गंगा किनारे इस रमणीय स्थल पर रहकर वर्षों तक साधना और शिक्षा देने का कार्य किया है। सन्त रामानन्द के पांच सौ से अधिक शिष्य सारे उत्तर भारत में घर घर जाकर धर्म भक्ति का प्रचार प्रसार करते थे। स्वामी रामानंद जी आध्यात्मिक, चमत्कारिक व क्रांतिकारी महापुरुष थे। उन्होंने रामानुजाचार्य की भक्ति परम्परा को उत्तर भारत में लोकप्रिय बनाने के लिए रामावत सम्प्रदाय का गठन कर रामतंत्र का प्रचार किया। उन्होंने अनंतानंद, भावानंद, पीपा, सेन नाई, धन्ना, नाभादास, नरहर्यानंद, सुखानंद, कबीर, रैदास, सुरसरी, पदमावती जैसे बारह लोगों को अपना प्रमुख शिष्य बनाया था। मोक्षदायिनी गंगा नदी किनारे इस मठ के पास स्थित मुक्तिधाम का जीर्णोद्धार कर विकसित किया जाएगा। यहां नियमित योग शिविर के साथ आध्यात्मिक साधना के लिए पुस्तकालय, शांतिकक्ष, मंदिरों का सौंदर्यीकरण, चहारदीवारी, समाधि स्थल का सुंदरीकरण, अतिथिगृह और बाग बगीचों का विस्तार किया जाएगा। मठ के महंत देवानंद जी महाराज बताते है कि इस मठ में महान संत पवहारी बाबा भी कई महीनों तक रहकर साधना किये है। यहां पवहारी बाबा ने स्वंयम्भू शिवलिंग की स्थापना कर शिव मंदिर का निर्माण कराया है। पवहारी बाबा के ब्रम्हलीन होने के बाद शिष्यों ने उनके शरीर के आंशिक भाग को यहां लाकर उनकी समाधिस्थल बनाई है। नैसर्गिक और प्राकृतिक सौंदर्य युक्त इस मठ में पवहारी बाबा का समाधिस्थल और स्वामी रामानंद जी का साधना स्थल एक दूसरे के आमने सामने स्थित है।

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