गाजीपुर-आसन नहीं है कैलाश यादव होना-पुण्यतिथि पर स्मरण

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समाजवादी आंदोलन में प्रभावी स्थान बनाना है तो नई पीढ़ी के साथी उनके जीवन से प्रेरणा लें

गाज़ीपुर की समाजवादी राजनीति में कड़ी प्रतिस्पर्धा है। इस प्रतिस्पर्धा के बीच आप समाजवादी आंदोलन को भी प्रभावी बनाने की इच्छा रखते हैं तो यह प्रतिस्पर्धा और अधिक कड़ी और चुनौती भरी होगी। उस विधानसभा क्षेत्र में और अधिक होगी जहां आपकी सोच और आपके सामाजिक आधार वाला विधायक पहले से हो। यह प्रतिस्पर्धा तब और अधिक कड़ी होगी, जब इस विधायक का पुत्र भी विधायक हो गया हो। श्री कैलाश यादव ने अपनी सफलता की इबारत इसी नामुमकिन वाले माहौल में लिखी।

पुराने साथी जानते होंगे। फिर भी इसकी चर्चा इसलिए जरूरी है कि नए साथी भी जान लें कि श्री कैलाश यादव जिस जमानियां विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने, वहां से 1974 में श्री धरमू मुनीब जी चुनाव जीते थे। इस क्षेत्र से मुनीब जी के पुत्र श्री रविन्द्र यादव भी विधायक रहे। यानी जगह रिक्त नहीं थी। जिस समाज के बल पर धरमू मुनीब जीते, उनके पुत्र रविन्द्र यादव इसी विधान सभा क्षेत्र से चुनाव जीते। दोनों की जीत उसी समाज के बल पर थी जिसके बल पर श्री कैलाश यादव को भी अपनी सफलता की इबारत लिखनी थी, इसलिए यह कार्य नामुमकिन नहीं लेकिन लोहे का चना चबाने जैसा कठिन था।
इन्हीं मुश्किलातों के बीच श्री कैलाश यादव ने जमानियां विधानसभा क्षेत्र से पार्टी का टिकट भी हासिल किया और सफलता भी। एक बार नहीं दो बार। तीसरी बार वह जंगीपुर से विधायक बने। वह समाजवादी पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष श्री मुलायम सिंह यादव की सरकार में भी मन्त्री रहे और समाजवादी पार्टी वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव की सरकार में भी।

बड़े से बड़े प्रभावी आदमी के लिए भी यह सफलता बहुत बड़ी सफलता है। किसी सामान्य कार्यकर्ता के लिए तो सफलता की यह उपलब्धि एक ऐसा सपना है जिसका साकार रूप देखना नामुमकिन नहीं है तो लोहे का चना चबाने की तरह कठिन जरूर है। और श्री कैलाश यादव ने समाजवादी पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा और समर्पण के बल पर इस लोहे के चने को सामान्य चना बना दिया जिसे वह हंसते हंसते ताउम्र चबाते रहे। वह मन्त्री होने के बाद भी एक मामूली कार्यकर्ता बने रहे।

जो भी साथी समाजवादी सियासत में इस तरह की नामुमकिन लगने वाली उपलब्धि को मुमकिन करना चाहते हैं, उन्हें

श्री कैलाश यादव के जीवन को नजदीक से पढ़ना चाहिए। उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और सफलता हासिल करनी है तो कैलाश यादव बनना होगा। वैसे कैलाश यादव होना आसान नहीं है।

श्री कैलाश यादव – एक नज़र में : 1951 में जैतपुरा ग्राम के किसान परिवार में जन्मे श्री कैलाश यादव ने अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत 1988 में ग्राम प्रधान के रूप में की थी।
1995 – 96 में जिला पंचायत सदस्य चुने गए
1996 में 13वीं विधानसभा में सदस्य के तौर पर निर्वाचित
2002 में 14वीं विधानसभा के लिए दोबारा विधायक चुने गए। वह
2002-03 में विधानसभा की प्राक्कलन समिति के सदस्य रहे।
2003-2007 में वह श्री मुलायम सिंह यादव के मंत्रिमंडल में राजस्व व औद्योगिक विकास मंत्री रहे।

2012 में 16वीं विधानसभा के लिए तीसरी बार चुने गए और श्री अखिलेश यादव के मंत्रिमंडल में पंचायतीराज मंत्री बने।

काल के क्रूर हाथों ने 9 फरवरी 2016 को श्री कैलाश यादव के शरीर को हमसे छीन लिया लेकिन उनके विचार, समाजवादी विचारों के प्रति उनकी निष्ठा आज भी हमारे बीच जीवित है। ईश्वर श्री कैलाश यादव की आत्मा को शांति दे।
आज जंगीपुर से श्री कैलाश यादव के पुत्र डाक्टर श्री वीरेन्द्र यादव विधायक हैं। आने वाले दिनों में सूबे में अगर श्री अखिलेश यादव की सरकार बनी तो डाक्टर श्री वीरेन्द्र यादव भी मन्त्री होंगे और उन सपनों को मूर्त रूप देंगे जिसे श्री कैलाश यादव ने कठिन मुश्किलातों में भी देखा था। (धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव के फेसबुक वाल से)

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