गाजीपुर-चालबाज भाईजान मुख्तार अंसारी

गाजीपुर-दिन के 11:00 बजे होंगे मैं अपने सहयोगी संजय यादव के साथ पीरनगर चौराहे पर स्थित विक्की की चाय की दुकान पर चाय पीने पहुंचा। अभी मैंने और संजय ने चाय पीना शुरू ही किया था कि अचानक हमारे प्रिय बातूनी भाई आ गए और शुरू हो गये।आते ही बातूनी भाई ने अपनी ज्ञान भरी बातें शुरू कर दिया।उन्होंने अपनी बात को शुरू करते हुए कहा कि लफंटू भाई (बातूनी मुझे प्यार से लफंटू कहते है) जब भाईजान मुख्तार अंसारी को व्हील चेयर पर बैठकर पंजाब के न्यायालय में पेश किया जा रहा था तो देखकर मेरा कलेजा मुंह को आ गया। फिर इसके बाद जब बाँदा की जेल पुलिस भाई जान को लेने पंजाब के रोपण जेल पहुंची तो वहां जेल से जब व्हील चेयर पर बैठ एंबुलेंस मे आये तो मुख्तार भाई की हालत को देखकर मेरा दिल जार-जार रोया।लेकिन जब अखबारों मे पढा कि भाईजान का काफिला आते समय कानपुर देहात के मुगल रोड पर जब अचानक पशुओं के आने कारण कुछ समय के लिए रूका तो भाईजान ने एंबुलेंस से उतर कर सडक़ पर चहल कदमी किया, इसके बाद भाईजान ने लघुशंका/पेशाब करने हेतू सट्टी थाने मे बने सौचालय मे 20 मीटर दुर आराम से अपने पैरों पर चलकर गये तो मैने अल्लाह का शुक्रिया अता किया।इसके बाद जब भाईजान बाँदा जेल मे पंहुचने पर एंबुलेंस से उतर कर अपना दोनों बैग खुद लेकर 15 मीटर दुर बैरक मे गये तो तबीयत गार्डन-गार्डन हो गयी।मैने बातूनी भाई से उनके इतना अधिक खुश होने का जब रहस्य पुछा तो बातूनी एक बार फिर चालू हो गये।बातूनी ने मुझे भाईजान के व्हील चेयर वाले आईडिया का रहस्य बताते हुए कहा कि कानपुर वाला विकास दुबे याद है जिसकी रास्ते मे गाडी पलट गयी थी और पुलिस ने मुठभेड़ मे मार डाला था।वाराणसी वाले सार्प शूटर गिरधारी विश्वकर्मा की लखनऊ मे हुई मुठभेड की कहानी याद है ? अब लफंटू भाई तुम्ही बताओ व्हील चेयर वाला आईडिया सुपर था की नहीं ? व्हील चेयर पर बैठ आदमी भाग तो सकता नहीं ? फिर पुलिस मुठभेड़ कैसे करती ? मैने भी भाईजान के आईडिया की दाद देते हुए बातूनी से कहा कि बातूनी भाई अब तो जगजाहिर है कि आपके भाईजान के दोनों पैर व स्वास्थ्य सही सलामत है लेकिन जेल मे बन्द मुन्ना बजरंगी की हुई मौत आपको याद है या भूल गये बातूनी भाई ? बातूनी मेरे बात का जबाब दिये बगैर चलता बने।

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