गाजीपुर टुडे-स्कूल आसमां के निचे

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देवकली। कोरोना संक्रमण के चलते स्कूलों के कई माह से बंद होने से बच्चों की पढ़ाई न सिर्फ बाधित हो गई है, बल्कि बहुत से बच्चे किताबों से काफी दूर हो गए हैं। जिसके चलते उनको दोबारा से किताबों की तरफ खींचना काफी मशक्कत का काम साबित हो रहा है। ऐसे में बच्चों को नए तरीकों से शिक्षित करने के लिए शिक्षकों अथवा स्कूलों द्वारा आयेदिन नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा से हो रही असुविधा को देखते हुए जनपद के विकास खण्ड देवकली के ग्राम पौटा स्थित कम्पोजिट जूनियर हाई स्कूल के संकुल शिक्षक सुरेन्द्र भारद्वाज ने अनूठा व प्रेरणादायी प्रयोग किया है। वो 6 टीचिंग सेंटर बनाकर प्रत्येक सेंटर पर गांव के ही बीटीसी अथवा बीएड प्रशिक्षु को वालंटियर बनाकर वहां नियुक्त करके कक्षाएं संचालित करा रहे हैं। ये कक्षाएं बेहद सफल भी हो रही हैं। उन सेंटरों पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक अवधेश यादव, आशीष कुमार, पंकज कुशवाहा, विजय चक्रवर्ती, अजीत यादव, अजीत प्रताप आदि पढ़ाने का काम कर रहे हैं। स्मार्टफोन के अभाव में ऑनलाइन कक्षाओं का प्रयोग न कर पाने वाले वंचित बच्चों के परिजन इन कक्षाओं से बेहद खुश हैं। ये कक्षाएं ‘मेरा विद्यालय, मेरा घर’ के नाम से गांवों में किसी पेड़ के नीचे अथवा बगीचे में चलाई जा रही हैं। जिसकी लोग जमकर सराहना कर रहे हैं। कक्षाएं सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक चलती हैं, जिसमें बैठने के लिए बच्चे अपने साथ बोरी आदि लेकर जाते हैं और फिर दूर-दूर बैठ जाते हैं। शिक्षक अपने लिए कुर्सी व लिखने के लिए बोर्ड अपने साथ लेकर आते हैं। इस बाबत प्रधानाध्याक अवधेश नारायण ने बताया कि पहले हमने शासन की मंशा के अनुरुप ऑनलाइन कक्षाएं चलाईं, लेकिन अधिकांश बच्चों को लाभ नहीं मिल पाता था। जिसके बाद अब ऑनलाइन के साथ ही ये कक्षाएं भी संचालित कर दी गईं, ताकि उनका अध्यययन न बाधित हो सके। वहीं अभिभावक हंसराज, राधेश्याम, दिलीप, संगद आदि का कहना है हमारे पास स्मार्टफोन नहीं है और अगर है भी तो बच्चों के आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता था। लेकिन अब इस नई व्यवस्था से न सिर्फ हमारी, बल्कि बच्चों की पढ़ाई की समस्या दूर हो गई है।

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