गाजीपुर-पुरे प्रदेश में हहाकार

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गाजीपुर-बिजली बिभाग के निजीकरण के विरोध में महीनों से विभिन्न तरीकों से आंदोलन कर रहे विद्युत कर्मचारियों की मांगों पर जब उत्तर प्रदेश सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया तो उत्तर प्रदेश के विद्युत कर्मचारियों ने दिनांक 5 अक्टूबर की सांम से कार्य बहिष्कार का एलान करते हुए कार्य बहिष्कार कर दिया।इनके कार्य बहिष्कार करते ही विद्युत का उत्पादन और वितरण पूरी तरह से पूरे प्रदेश में ठप हो गयाः ऐसी हालत में पूरे प्रदेश में विद्युत आपूर्ति के अभाव में हाहाकार मच गया।कहीं पीने के पानी का अभाव , कहीं नहाने के पानी का अभाव, लगभग सभी के घरों के इनवर्टर ने जवाब दे दिया, यहां तक कि लोगों ने घरों में लगे हुए समरसेबल से पानी की टंकी को भरने के लिए ₹20 प्रति मिनट की दर से जरनेटर को किराए पर लेना पडा।गाजीपुर जनपद में ऐसे जनरेटर वालों ने 5 अक्टूबर की साम से 6 अक्टूबर को पुरे 20 रूपये प्रति मिनट खूब कमाया। लाइट के अभाव में जो लोग 5 अक्टूबर की रात में सो नहीं पाए उन्हें किसी तरह से भोर में नींद आई। जिन लोगों को भोर में और प्रातः में नहाने की आदत थी उनके नहाने का पानी जल निगम की टंकियों से नहीं आने के कारण उन्हें नहाने के लिए गंगा जी का सरण लेना पड़ा। पूरी रात और पूरे दिन जनरेटर के शोर से अड़ोस पड़ोस तथा पूरा शहर 5 अक्टूबर की रात्रि से 6 अक्टूबर के पूरे दिन डिस्टर्ब रहा।विद्युत कर्मचारियों को मनाने के लिए ,समझाने के लिए 5 अक्टूबर की शाम से ही वार्ताओं का दौर जारी है लेकिन सरकार बिजली विभाग का निजीकरण करने पर अड़ी है तो वहीं विद्युत कर्मचारी निजीकरण का विरोध करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। विद्युत कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार और सरकार के निजी करण करने की जिद में प्रदेश का आम आदमी पीस रहा है।

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