गाजीपुर-बढती मातृ व शिशु मृत्यु दर से सरकार चिंतित-डा.डीपी सिन्हा

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गाजीपुर-जनपद में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने को लेकर एक दिवसीय जनपद स्तरीय सेवा प्रदाताओं की काउंसलिंग के लिए एक कार्यशाला का आयोजन मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के मीटिंग हॉल में सीएमओ डॉ जीसी मौर्य की अध्यक्षता में किया गया। कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाली जनपद के विभिन्न ब्लाकों से आई हुई एएनएम को डब्ल्यूएचओ के द्वारा बनाई गई एक शॉर्ट फिल्म को दिखलाकर प्रशिक्षित करने का कार्य किया गया।

परिवार नियोजन के नोडल अधिकारी और एसीएमओ डॉ. के.के.वर्मा ने बताया कि आज भी ग्रामीण इलाकों में गर्भवती माताओं में एनीमिया की कमी, प्रसव पूर्व जांच न कराने ,बच्चों में अंतर न रखने की वजह से मातृ मृत्यु दर में लगातार इजाफा होता जा रहा है। इन्हीं सब बातों को देखते हुए शासन स्तर पर इस तरह के वर्कशॉप कराने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि 2019 के आंकड़े की बात करें तो उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष 12000 मातृ मृत्यु होती है जिसमें प्रति एक लाख में 197 की मौत होती है। उन्होंने बताया कि यदि महिलाएं परिवार नियोजन के संसाधनों को अपनाएं तो 3600 महिलाओं को मौत से बचाया जा सकता है।

एसीएमओ डॉ उमेश कुमार ने बताया कि प्रायः देखा जाता है कि 20 वर्ष से कम की युवतियों और महिलाओं को गर्भधारण करने पर मातृ मृत्यु के रिस्क ज्यादा होती है। क्योंकि 100 में से 54 की किशोरिया एनीमिक होती हैं। जबकि 100 में से 21 किशोरियों की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में शादी हो जाती है जिसमें से 21 में से 7 किशोरियों जल्दी गर्भवती हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि प्रायः वीएचएनडी एवं टीकाकरण सत्र पर बच्चों को उनकी दादी के द्वारा टीकाकरण के लिए लाया जाता है। ऐसे में उनसे बहू को भी साथ में लाने के बारे में कहां जाए। ताकि उन्हें परिवार नियोजन से संबंधित जानकारियां दी जा सके। या फिर ऐसे परिवार का गृह भ्रमण कर काउंसलिंग किया जा सकता है।
मातृ मृत्यु दर अधिक होने के कई कारण बताए गए हैं। जिसमें प्रसव पूर्व जांचों का ना होना,खून की कमी, प्रसव पूर्व तैयारियों का अभाव,अनचाही गर्भावस्था, दो बच्चों के मध्य समय का कम अंतराल गर्भवती महिलाओं की मृत्यु का मुख्य कारण है। इसे हम प्रसव पूर्व चार जांच कराकर,बच्चों में अंतराल,परिवार नियोजन के साधन के माध्यमों से कर कर किया जा सकता है। साथ ही सेवा प्रदाता की भूमिका गर्भवती महिला को परिवार विजिट के दौरान परिवार नियोजन के बारे में बताना खासकर हाई रिस्क प्रेगनेंसी महिला को इस बारे में पूरी जानकारी देना। ताकि वह स्वयं और आने वाले बच्चों को भी सुरक्षित रख सके।
इस कार्यक्रम में कोविड-19 के नोडल डॉ मनोज सिंह,एसीएमओ डॉ डीपी सिन्हा,परिवार नियोजन विशेषज्ञ तबरेज अंसारी,डीसीपीएम अनिल वर्मा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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