गाजीपुर-सडकों पर बेधड़क घूम रहे मानक विहीन नम्बर प्लेट

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गाजीपुर-सड़कों पर तमाम तरह के डिजायनर वाहन नम्बर प्लेट देखने को मिलते है। पुलिस और परिवहन विभाग के आदेशों की अवहेलना करते हुए दो पहिया और चारपहिया वाहन मालिक अपने गाड़ियों में हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट लगाने में उदासीन है। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना वाहन निर्माता कंपनियों के साथ-साथ ग्राहकों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है जिससें वाहन चोरी की वारदातों में कमी आएगी। एचएसएनपी नंबर प्लेट्स को सरकार के वाहन डेटाबेस से भी जोड़ा गया है, जिसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ सम्भव नही है। इसमें मौजूद रजिस्ट्रेशन मार्क, क्रोमियम-बेस्ड होलोग्राम स्टिकर ऐसे होंगे कि निकालने पर कोशिश पर खराब हो जाएंगे। इस पर लगे स्टिकर में गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ, रजिस्टर अथॉरिटी, लेजर ब्रांडेड परमानेंट नंबर, इंजन और चेसिस नंबर तक की जानकारी है।
6 प्रकार के होते है नम्बर प्लेट
सफेद प्लेट: यह प्लेट पर्सनल गाड़ियों की होती है जिसका कमर्शियल यूज नहीं किया जाता है।
पीली प्लेट: यह नंबर प्लेट टैक्सी ट्रक कार जीप आदि कर्मशियल इस्तेमाल की गाड़ियों में लगते है।
नीली प्लेट: यह नंबर प्लेट एक ऐसे वाहन को मिलती है, जिसका इस्तेमाल विदेशी प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है।
काली प्लेट: इस रंग के प्लेट वाली गाड़ियां भी आमतौर पर कमर्शियल वाहन ही होती है ये किसी खास व्यक्ति के लिए होती है।
लाल प्लेट: अगर किसी गाड़ी में लाल रंग की नंबर प्लेट है तो वह गाड़ी भारत के राष्ट्रपति या फिर किसी राज्य के राज्यपाल की होती है।
तीर वाली नंबर प्लेट: गोपनीयता के लिए सैन्य वाहनों के लिए अलग तरह की नंबरिंग प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है।

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