दलितों और राजपूतों मे बवाल, पुर्व मंत्री की कार भी क्षतिग्रस्त

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गाजीपुर- रेवतीपुर थानाक्षेत्र के नवली गाँव निवासी कपडा व्यवसायी अख्तर की लाश का पोस्टमार्टम करा कर घर वापस पहुंचे ग्राम प्रधान देर शाम वापस आने पर पिकअप की सफाई के लिए दलित बस्ती में रहने वाले अपने चालक को फोन किए लेकिन उसका स्विच ऑफ था। लिहाजा अपने बेटे प्रदीप को उसके घर भेजे। प्रदीप दलित बस्ती दक्षिणी पहुंचा और चालक को अपने अंदाज में आवाज दिया। उसी बीच वहां मौजूद कुछ मनबढ़ दलितों ने प्रदीप के उस अंदाज पर आपत्ति की। इसको लेकर प्रदीप से वह कहासुनी करने लगे और फिर उस पर हमला कर दिए। लहूलुहान प्रदीप घर लौटा। तब उसका भाई हलचल, चाचा रमाशंकर व अशोक शिकायत लेकर मौके पर पहुंचे। दलित युवक उन्हें भी पीटना शुरू कर दिए। किसी तरह वह सभी उनके चंगुल से बचकर अपने कटरे पर आए। यह जानकारी मिलने के बाद ग्राम प्रधान के कुछ लोग कटरे पर पहुंचने लगे। फिर तो रात करीब आठ बजे हमलावर दलित युवक लाठी-डंडे के साथ अपनी बस्ती के लोगों को लेकर सड़क पर आकर मोर्चा संभाल लिए। टीबी रोड के निर्माण के लिए वहां स्थापित मिक्सर प्लांट का जेनरेटर बंद कर दिए और ग्राम प्रधान के कटरे के पास पहुंच कर पथराव करने लगे। आसपास की गुमटियों को तोड़, पलट दिए। सूचना पर यूपी-100 की टीम पहुंची। तब दलितों ने उसके शीशे तोड़ दिए। हालात की नाजुकता समझ वह टीम वहां से निकलने में ही भलाई समझी। संयोग से किसी मांगलिक कार्यक्रम से अपने घर सेवराईं लौट रहे पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह भी पहुंच गए। दलितों ने उन्हें भी घेर लिया। वह कुछ समझ पाते कि उनकी भी गाड़ी के शीशे तोड़ दिए गए। उन्हें बचाने की कोशिश में पूर्व प्रमुख मारकंडेय सिंह के भतीजे अशोक सिंह को चोटें आईं। बावजूद किसी तरह श्री सिंह उनसे बच कर एक ग्रामीण की बाइक पर बैठ चले गए। ग्रामीणों का कहना है कि दलितों ने दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग भी की। काफी देर बाद गहमर सहित आसपास के थानों के अलावा जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर पहुंचा तब लाठियां पीट कर दलितों को तितर-बितर किया। फिर बुधवार की सुबह ग्राम प्रधान के पक्ष के सैकड़ों लोग चट्टी पर एकत्र हुए लेकिन वह लौट भी गए। तब गांव की दक्षिणी सहित उत्तरी दलित बस्ती के लोग लाठी-डंडे, गंड़ासे लिए फिर मोर्चा संभाल लिए। उसके बाद पूरी जमानियां सर्किल के थानों की फोर्स के अलावा जिला मुख्यालय से पीएसी भेजी गई। फोर्स देख दलित अपनी बस्तियों को लौट गए। फिलहाल गांव में फोर्स डटी है। एसओ रेवतीपुर रामबहादुर चौधरी ने बताया कि अभी तक किसी पक्ष से कोई तहरीर नहीं मिली है और न किसी को हिरासत में ही लिया गया है। उन्होंने भी माना कि गांव में तनाव बना हुआ है।

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