भ्रष्टाचार के आरोपी ग्रामोद्योग के चपरासी को कोर्ट से भी राहत नही

गाजीपुर कोतवाली स्थित ग्रामोद्योग कार्यालय में तैनात कर्मचारी कमलकांत साहनी को 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी और आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में कोर्ट से राहत नहीं मिली। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी की अदालत ने पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को खारिज करते हुए पुन: विवेचना करने का आदेश दिया है।

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कोर्ट ने कहा कि विवेचक ने आरोपी कमलकांत, उसके परिवार के सदस्यों, कुछ स्वतन्त्र गवाहों के बयानों व उनके शपथपत्रों के आधार पर संपत्ति को पारिवारिक बता दिया और क्लीनचिट दे दी। जबकि विवेचक को दिए बयान में दो स्वतन्त्र गवाहों ने स्पष्ट कहा है कि आरोपी के पत्नी व बच्चे अलग रहते है। उनका संयुक्त परिवार नहीं है और अर्जित सम्पत्ति आरोपी की ही है। ऐसे में मामले की फिर से विवेचना कराना न्याय संगत है। प्रकरण के मुताबिक गाजीपुर के सिउरा निवासी तेज प्रताप राय ने आरोप लगाया था कि कमलकांत ग्रामोद्योग कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है, लेकिन उसने अवैध तरीके से करोड़ों की सम्पत्ति बनाई है। इसके बाद ग्रामोद्योग बोर्ड सतर्कता विभाग के उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी एनपी मौर्य ने जांच की। बाद में कोर्ट के आदेश पर गाजीपुर के कोतवाली थाना में केस दर्ज किया गया ।

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