संविदाकर्मि- शोषितों, लाचारों, मजबूरों का नाम है- सुरज प्रताप सिह

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गाजीपुर- आंगनवाडी कर्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन उत्तर प्रदेश गाजीपुर इकाई के जिला संरक्षक सूरज प्रताप सिंह पुनीत ने कहा है कि संविदा कर्मी नाम के लोग जिला प्रशासन ,प्रदेश प्रशासन और भारत सरकार के द्वारा शोषितों लाचारो व मजबूर लोगों का नाम है । संविदा कर्मी भारत सरकार या उत्तर प्रदेश सरकार के स्थाई कर्मचारियों से कहीं ज्यादा कार्य करते हैं लेकिन उन्हें बदले में मात्र 3000 से लेकर 9000 तक का मानदेय दिया जाता है। संविदा शब्द का अर्थ किसी काम के बदले स्वेच्छा से दिया गया धन है.। उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष हजारों संविदा तथा प्राइवेट लाइनमैनों की मौत विद्युत दुर्घटना में होती है। लेकिन न तो उनका जीवन बीमा होता है, ना ही इन प्राइवेट अथवा संविदाकर्मी लाइनमैनोन के परिवारों के प्रति सरकार का कोई दायित्व होता है। इसी प्रकार आंगनबाडी कार्यकरतिया पल्स पोलियो, समाजवादी पेन्शन का सत्यापन, राशन कार्डों का सत्यापन, टीका करण, तमाम सर्वे फ्री मे करती है लेकिन इनका भी न जीवन बीमा है, न पी०एफ०, न एक दिन का अवकाश है । मैं सूरज प्रताप सिंह पुनीत जिला संरक्षक आंगनबाड़ी कर्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन प्राइवेट व संविदा कर्मी लाइनमैन का एक संगठन बनाना चाहता हूं ताकि इनके दुर्घटना में मृत्यु होने पर उत्तर प्रदेश सरकार अथवा भारत सरकार से सामाजिक सुरक्षा अधिनियम के तहत इनके परिवार को लाभ दिलवा सकूं। विद्युत विभाग से संवंधित पूर्व में जितने भी कर्मचारी संगठन बने हुए हैं उन के माध्यम से इनका कोई भला मुझको होता हुआ नहीं दिख रहा है।

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