सुप्रीम कोर्ट का वह फैसला जिस से भारत सरकार सहित राज्य सरकारें है भयभीत

दिल्ली – समान काम -समान बेतन के माँग को लेकर पंजाब के संबिदा कर्मियों ने पंजाब उच्च न्यायालय मे एक याचिका दाखिल किया । जगजीत सिह व अन्य बनाम पंजाब राज्य सरकार व अन्य । याचिका का निस्तारण कर हुए पंजाब उच्च न्यायालय ने याचियों के पक्ष मे फैसला देते हुए पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि  ” याचिका कर्ताओं की समान काम-समान बेतन की माँग जायज है। पंजाब उच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार ने उच्चतम न्यायालय मे अपील सं० 213 /2013 , स्टेट आँफ पंजाब एन्ड अदर्श बनाम जगजीत सिह एन्ड अदर्श के नाम से दाखिल किया। इस रिट के साथ समान मांग वाली लगभग 52 रिट कनेक्ट थी। इस मामले का निस्तारण करते हुए मा०उच्चतम न्यायालय ने समान काम समान बेतन के माँग को जायज माना। इस फैसले के बाद भारत सरकार की नीद उड गयी कि अब पुरे देश के संविदा कर्मी समान काम समान बेतन की माँग करते हुए पुरे देश के उच्च न्यायालयों मे रिट दाखिल करेगें और फैसला उनके पक्ष मे ही होगा। उच्चतम न्यायालय के इस फैसले को निस्फल करने के लिये भारत सरकार ने  मजदुरी संदाय अधिनियम 1936, न्यूनतम मजदुरी अधिनियम 1948 ,बोनस संदाय अधिनियम 1965 , समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 को कुंट पीस कर एक नया मजदूरी संहिता बिल 2017 लाने जा रही है। इस बिल के पास हो जाने पर कोई भी संविदा कर्मी समान काम -समान बेतन की माँग नही कर पायेगा।

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