ग़ाज़ीपुर

श्री जगन्नाथ मंदिर काशी, विवाद 52 बीधा में से 40 से 45 बीघा जमीन पर कब्जा

वाराणसी, 04 जून 2026 – काशी के असि घाट स्थित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार और भव्य कॉरिडोर निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। 1 मई 2026 को कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती के कर-कमलों से इस कॉरिडोर और मंदिर के नवनिर्माण की आधारशिला रखी गई। ट्रस्ट के अनुसार मुख्य परिसर 1 लाख वर्ग फीट से अधिक में फैला होगा और मंदिर का शिखर 108 फीट ऊंचा बनाया जाएगा, जिसे गंगा तट से भी देखा जा सकेगा।240 साल पुराना है इतिहास:मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, पुरी के मुख्य जगन्नाथ मंदिर के प्रमुख पुजारी स्वामी ब्रह्मचारी को वाराणसी निर्वासित कर दिया गया था। उन्हें स्वप्न में यहां मंदिर निर्माण का आदेश मिला, जिसके बाद उन्होंने पंडित बेनीराम और विशंभर पंडित से चर्चा की। वर्ष 1780 में मंदिर का निर्माण शुरू हुआ और 1790 में पूरा हुआ। तब से यह मंदिर काशी में पुरी की आध्यात्मिक आभा बिखेर रहा है। मंदिर बनने के साथ ही यहां रथ यात्रा मेले की भी शुरुआत हुई, जो आज भी पूरी की तर्ज पर निकाली जाती है। 1952 में बना ट्रस्ट,अब हो रहा जीर्णोद्धार:1952 में मंदिर प्रबंधन के लिए एक ट्रस्ट बनाया गया। ट्रस्ट के पदाधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक मंदिर के पूर्ण जीर्णोद्धार पर ध्यान नहीं दिया गया। हाल ही में ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह को सदस्य के रूप में जोड़ा और बाद में उन्हें श्री जगन्नाथ जी मंदिर असि काशी का अध्यक्ष नियुक्त किया। पंडित शैलेश त्रिपाठी को मंदिर का सचिव बनाया गया है। जमीन पर कब्जे का आरोप :ट्रस्ट का दावा है कि मंदिर की कुल 52 बीघा जमीन में से लगभग 40-45 बीघा पर कब्जा हो चुका है। वर्तमान में बची हुई 5-10 बीघा जमीन पर मंदिर परिसर स्थित है, जहां अब जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया है। ट्रस्ट अध्यक्ष बृजेश सिंह ने कहा कि मंदिर और कॉरिडोर निर्माण की पूरी जिम्मेदारी उन्होंने ली है। विवाद पर ट्रस्ट का पक्ष:ट्रस्ट से जुड़े लोगों का आरोप है कि कुछ लोगों ने मंदिर के गर्भगृह में भी बदलाव किए हैं। उनका कहना है कि मंदिर पर कब्जे को लेकर पहले आवाज नहीं उठाई गई। ट्रस्टी दीपक शापुरी के अनुसार, पुजारी की नियुक्ति और हटाने संबंधी सभी कार्य प्रॉपर डॉक्यूमेंट के साथ किए गए हैं।ट्रस्ट के अनुसार, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी पत्र लिखकर मंदिर जीर्णोद्धार के कार्य की सराहना की है। क्या है योजना: नए प्रोजेक्ट के तहत मंदिर परिसर का विस्तार, कॉरिडोर निर्माण, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं और 108 फीट ऊंचे शिखर का निर्माण प्रस्तावित है। ट्रस्ट का कहना है कि इससे काशी की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी। रथयात्रा का प्रबंधन भी वर्तमान में ट्रस्ट की देखरेख में होता है।