ग़ाज़ीपुर

शेरपुर के लाल असिस्टेंट कमांडेंट प्रेम शंकर राय को वीरता पुरस्कार, सुकमा में 17 नक्सलियों को किया था ढेर

भांवरकोल/गाजीपुर, 05 जून 2026 – बलिदानियों की धरती गाजीपुर के शेरपुर गांव ने एक बार फिर गौरव का परचम लहराया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में तैनात असिस्टेंट कमांडेंट प्रेम शंकर राय को वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में चलाए गए बड़े नक्सल विरोधी अभियान में अदम्य साहस और बहादुरी दिखाने पर उन्हें यह सम्मान दिया जा रहा है। सुकमा में 17 नक्सलियों को किया था ढेर: 29 मार्च 2025 को सुकमा जिले के थाना केरलापाल क्षेत्र के नेड़ुम-उपमपल्ली के जंगल और पहाड़ी इलाके में सीआरपीएफ, डीआरजी और सिविल पुलिस की संयुक्त टीम ने कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन चलाया था। इसी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों की नक्सलियों से भीषण मुठभेड़ हुई। असिस्टेंट कमांडेंट प्रेम शंकर राय के नेतृत्व में सीआरपीएफ 159वीं बटालियन के जवानों ने बहादुरी से मोर्चा संभाला। कई घंटे चली मुठभेड़ में 17 नक्सली मारे गए। मौके से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद हुई थी। इस ऑपरेशन में सीआरपीएफ के सिपाही मनोज कुमार समेत तीन डीआरजी जवान घायल हो गए थे। 159 वीं बटालियन को मिलेगा उत्कृष्ट सेवा सम्मान :इस सफल ऑपरेशन के बाद सीआरपीएफ की 159वीं बटालियन के अधिकारियों और जवानों को वीरता एवं उत्कृष्ट सेवा सम्मान के लिए चुना गया है। असिस्टेंट कमांडेंट प्रेम शंकर राय को व्यक्तिगत वीरता पुरस्कार से नवाजा जाएगा। इससे पहले भी प्रेम शंकर राय को उनकी बहादुरी के लिए महानिदेशक के प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया जा चुका है। शहादत की विरासत को आगे बढ़ा रहे प्रेम शंकर: प्रेम शंकर राय के पिता अमर शहीद विजय शंकर राय भी सीआरपीएफ में तैनात थे। 18 जुलाई 1992 को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में आतंकवादियों से लड़ते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए थे। देश सेवा में दिए गए सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पिता की शहादत से प्रेरणा लेकर प्रेम शंकर राय भी सीआरपीएफ में भर्ती हुए और आज देश की आंतरिक सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।प्रेम शंकर राय के वीरता पुरस्कार के लिए चुने जाने की खबर से शेरपुर गांव समेत पूरे भांवरकोल क्षेत्र में खुशी की लहर है। ग्रामीणों ने कहा कि शेरपुर की मिट्टी ने एक और सपूत देश को दिया है जो पिता की तरह देश सेवा में लगा है। परिजनों ने बताया कि प्रेम शंकर बचपन से ही देशभक्ति के जज्बे से भरे थे। पिता की शहादत के बाद उन्होंने ठान लिया था कि वे भी वर्दी पहनकर देश की रक्षा करेंगे।