क्यों चर्चा में है कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ? भाजपा की रणनीति ने ही दक्षिण भारत में उसे नुकसान पहुंचाया

इंदौर, 10 जून 2026 – आप चाहें या न चाहें, मानें या न मानें, मीनाक्षी नटराजन चुनाव आयोग से चुनाव लड़ने की जंग जीतें या हारें, वे राज्यसभा पहुंचे या न पहुंचें, पर एक बात साफ है: भाजपा ने जाने-अनजाने में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर की इस प्रखर वक्ता को प्रदेश कांग्रेस के भावी नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित कर दिया है। वे कांग्रेस के उन गिने-चुने चेहरों में से हैं जो भविष्य में पार्टी के फ्रंटलाइनर होंगे। हो सकता है आज नहीं तो कल प्रदेश कांग्रेस की कमान भी उनके हाथ में हो, और वो इस लायक भी हैं। वे उन चुनींदा नेताओं में से हैं जो राजनीति में ग्लैमर का तड़का लगाकर नहीं, बल्कि बौद्धिकता, तार्किकता और कर्मठता की जमीन पर खड़े होकर शालीनता से अपना काम करती हैं।1990 के दशक में वे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर का प्रतिनिधित्व कर दसियों बार राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में शीर्ष स्थान प्राप्त कर चुकी हैं। लेखक और विचारक हैं। हिंदी, अंग्रेजी, तमिल और तेलुगु पर एक समान अधिकार है। इन चारों भाषाओं में धाराप्रवाह बोलती हैं। अद्भुत और अप्रतिम वक्ता हैं।मंदसौर की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की अकेली ऐसी नेत्री हैं जिन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ने के एक हफ्ते बाद पूरा ऑडिटेड हिसाब पार्टी के कोषाध्यक्ष को भेजकर बाकी पैसा लौटाया था। जब लौटाया तो पूरी कांग्रेस हैरान रह गई थी। सब सोच रहे थे, अपनी पार्टी में कोई ऐसा नेता भी है क्या? अभी एक महीने पहले इंदौर की एक पत्रकार दंपत्ति के निकट परिजन हैदराबाद में एक हादसे का शिकार हो गए थे। आरोप है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मदद के नाम पर उनके साथ ठीक व्यवहार नहीं किया, पर मीनाक्षी जी ने ‘आउट ऑफ द वे’ जाकर उनकी मदद की। भाजपा या कांग्रेस के कुछ नेता आज उनका रास्ता रोक कर थोड़े समय के लिए खुश हो सकते हैं। हो सकता है कि यह आकलन गलत हो, पर लगता है कि उनका रास्ता रोकने वालों ने जाने-अनजाने में उनकी मंजिल आसान कर दी है।








