ग़ाज़ीपुर

एडीएम ने दिया अभियोजन की समीक्षा बैठक में दोषमुक्त मामलों की पुनः समीक्षा का निर्देश

गाजीपुर, 11 जून 2026 – अपर जिलाधिकारी वि/रा वेद सिंह चौहान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में अभियोजन कार्यों की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में अभियोजन अधिकारियों की कुशल पैरवी से मिली सजाओं का ब्योरा रखा गया और दोषमुक्त मामलों में अपील पर जोर दिया गया। मई माह में 41 वाद निस्तारित:बैठक में बताया गया कि माह मई, 2026 में भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत कुल 37 वादों का निस्तारण हुआ। इनमें 09 वाद में सजा हुई, 12 वाद सुलह तथा 16 वाद कमिट के आधार पर निस्तारित हुए। अन्य अधिनियम के अन्तर्गत 04 वाद निस्तारित हुए और चारों में सजा हुई। इन मामलों में मिली बड़ी सज़ा:1- हत्या में आजीवन कारावास: थाना मुहम्मदाबाद मु0अ0सं0 290/2021 में एडीजे न्यायालय ने 07.05.2026 को अभियुक्त अशरफ को आजीवन कारावास व 25,000 रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई। पैरवी ए.डी.जी.सी. अखिलेश सिंह ने की। 2- पॉक्सो में 14 साल की सजा: थाना खानपुर मु0अ0सं0 1378/2017 में पॉक्सो कोर्ट ने 08.05.2026 को अभियुक्त शशिपाल को 14 वर्ष कठोर कारावास की सजा दी। कुशल पैरवी वि.लो.अभि. रविकान्त पाण्डेय ने की। 3- पॉक्सो में 3 साल की कैद: थाना भुड़कुड़ा मु0अ0सं0 1482/2017 में पॉक्सो कोर्ट ने 08.05.2026 को अभियुक्त विमल उर्फ गोलू को 3 वर्ष साधारण कारावास की सजा दी। पैरवी रविकान्त पाण्डेय ने की। 4- NDPS में सजा: थाना रेवतीपुर मु0अ0सं0 02/2023 में NDPS कोर्ट ने 11.05.2026 को सरल राजभर को 3 वर्ष साधारण कारावास व 25,000 रुपये अर्थदण्ड दिया। पैरवी दिनेश कुमार सिंह गौतम ने की। थाना दिलदारनगर के मामले में सलीम को 20 दिन की कैद व 1000 रुपये जुर्माना हुआ। पैरवी प्रभु नारायण सिंह ने की। गवाहों और वारंट की स्थिति: अभियोजन संवर्ग में कुल 354 वारंट निर्गत हुए, जिसमें 275 तामिल हुए। 225 गवाह उपस्थित हुए, जिनमें 217 परीक्षित हुए। 08 गवाह पीठासीन अधिकारी के अवकाश व अधिवक्ताओं के कार्य से विरत रहने के कारण अपरीक्षित रहे। सत्र न्यायालयों में 399 सम्मन जारी हुए, 325 तामिल हुए। 299 गवाह उपस्थित हुए, 271 परीक्षित हुए। 28 गवाह अधिवक्ता हड़ताल व पी.ओ. के अवकाश के कारण परीक्षित नहीं हो सके। कुल 64 जमानत प्रार्थना पत्रों में 9 स्वीकृत और 55 अस्वीकृत हुए। एडीएम का निर्देश: एडीएम वि/रा ने निर्देश दिया कि सभी अभियोजक हर माह कम से कम एक वाद की केस डायरी बनाएं और पुलिस विवेचना की त्रुटियां नोट करें, ताकि स्टेट के विरुद्ध आदेश न हों। कुल 16 वादों में अभियुक्त दोषमुक्त हुए। एडीएम ने जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी व लोक अभियोजकों को निर्देशित किया कि रिहा हुए अभियुक्तों के वादों की पुनः विधिवत समीक्षा करें। यदि शासकीय हित में अपील जरूरी हो तो प्रस्ताव तैयार करें। जिन वादों में गवाह पक्षद्रोही हो रहे हैं, उन पर मुकदमा कर सजा दिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।